
नई दिल्ली। असम विधानसभा चुनाव (Assam Legislative Assembly Elections) में कांग्रेस (Congress) को बड़ा राजनीतिक झटका लगा है। राज्य के तीन पूर्व मुख्यमंत्रियों के बेटे इस चुनाव में हार गए हैं, जिससे ‘वंशवादी राजनीति’ पर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। इनमें से एक उम्मीदवार (Candidate) कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष और सांसद भी थे।
पूर्व मुख्यमंत्री तरुण गोगोई के बेटे गौरव गोगोई, जो असम कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष और तीन बार के सांसद रह चुके हैं, जोरहाट सीट से चुनाव मैदान में थे। उन्हें भाजपा के मौजूदा विधायक हितेंद्र नाथ गोस्वामी ने 23,182 वोटों के अंतर से हराया।
इसी तरह, पूर्व मुख्यमंत्री हितेश्वर सैकिया के बेटे देबब्रत सैकिया, जो नजीरा सीट से लंबे समय से विधायक और विधानसभा में विपक्ष के नेता भी रहे हैं, इस बार भाजपा के मयूर बोरगोहाईं से 46,000 से अधिक वोटों के बड़े अंतर से हार गए। यह सीट लंबे समय से उनके परिवार का मजबूत गढ़ मानी जाती थी।
एक और बड़ा झटका दिगंत बर्मन को लगा, जो पूर्व कार्यवाहक मुख्यमंत्री भूमिधर बर्मन के पुत्र हैं। वे बारखेत्री सीट से चुनाव लड़े, लेकिन भाजपा के नारायण डेका से 84,000 से ज्यादा वोटों के अंतर से हार गए। इसके अलावा पूर्व केंद्रीय मंत्री पवन सिंह घटवार के बेटे प्रांजल घटवार को भी करारी हार का सामना करना पड़ा। वे चाबुआ-लाहोवाल सीट से भाजपा उम्मीदवार बिनोद हजारिका से 89,000 से अधिक वोटों के अंतर से पराजित हुए।
इन नतीजों पर प्रतिक्रिया देते हुए असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा कि जनता ने सिर्फ पारिवारिक पहचान के आधार पर राजनीति करने की प्रवृत्ति को नकार दिया है। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे नेताओं को अपनी अलग राजनीतिक पहचान बनाने का अवसर मिला था, लेकिन वे ऐसा करने में असफल रहे। सरमा ने यह भी टिप्पणी की कि यह चुनाव परिणाम ‘खानदानी राजनीति’ के खिलाफ जनादेश के रूप में देखा जा सकता है, जिसमें जनता ने काम और प्रदर्शन को प्राथमिकता दी है।
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