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सावधान! भगवान के नाम पर ऐसा…गलत संकेत; फिल्म ‘हमारे बारह’ पर HC की टिप्पणी

नई दिल्‍ली(New Delhi) । मुस्लिम महिलाओं(muslim women) और कट्टरपंथी विचारधारा(Radical ideology) को लेकर आ रही बॉलीवुड फिल्म ‘हमारे बारह’ (bollywood movie humare 12)पर मंगलवार के दिन बॉम्बे हाई कोर्ट(Bombay high court) में सुनवाई हुई। अदालत ने कहा कि उसने अभिनेता अन्नू कपूर वाली फिल्म हमारे बारह देखी है और इसमें ऐसा कुछ भी आपत्तिजनक नहीं पाया है जो कुरान या मुस्लिम समुदाय के खिलाफ हो। या फिर इससे किसी तरह की कोई हिंसा भड़के ऐसा भी नहीं है। हालांकि पीठ ने यह भी कहा कि फिल्म का पहला ट्रेलर आपत्तिजनक था और सेंसर बोर्ड से सर्टिफिकेट मिलने से पहले ही इसे रिलीज कर दिया गया। ट्रेलर में कुछ बातें और पोस्टर परेशान करने वाले हैं। अदालत ने फिल्म निर्माताओं पर जुर्माना लगाने का आदेश दिया है।


सुनवाई के दौरान जस्टिस बीपी कोलाबावाला और फिरदोश पूनीवाला की बेंच ने कहा कि सेंसर बोर्ड से सर्टिफिकेशन मिलने से पहले ही फिल्म का ट्रेलर रिलीज करने पर फिल्म ‘हमारे बारह’ के निर्माताओं पर जुर्माना लगाया जाएगा। ट्रेलर के संबंध में पीठ ने फिल्म निर्माताओं से कहा, “ट्रेलर में कुछ बातें परेशान करने वाली हैं। इसलिए आपको याचिकाकर्ता की पसंद के चैरिटी के लिए कुछ भुगतान करना होगा। इस मुकदमेबाजी ने फिल्म को बहुत नुकसान पहुंचाया है।”

ध्यान रहे, मुस्लिम इस देश का दूसरा सबसे बड़ा धर्म

अदालत ने फिल्म निर्माताओं को सावधान रहने और रचनात्मक स्वतंत्रता की आड़ में किसी भी धर्म की भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाले संवाद और दृश्य शामिल नहीं करने की चेतावनी दी। अदालत ने कहा, “निर्माताओं को भी सावधान रहना चाहिए कि वे क्या डालते हैं। वे किसी भी धर्म की भावनाओं को ठेस नहीं पहुंचा सकते। वे (मुस्लिम) इस देश में दूसरा सबसे बड़ा धर्म हैं।”

भगवान के नाम पर ऐसा कुछ करने से गलत संकेत

पीठ ने कहा कि फिल्म में एक दृश्य है जहां किरदार अपनी बेटी को मारने की धमकी देता है और फिर अल्लाह का नाम लेता है। दिन भर चली सुनवाई के दौरान पीठ ने कहा, ”यह आपत्तिजनक हो सकता है। भगवान के नाम पर ऐसा कुछ करने से गलत संकेत जा सकता है। इस एक पंक्ति को हटाने से निर्माता की रचनात्मक स्वतंत्रता में कोई बाधा नहीं आएगी।” यह भी कहा गया कि यह आश्चर्य की बात है कि याचिकाकर्ता फिल्म के खिलाफ ऐसे बयान दे रहे हैं जबकि उन्होंने फिल्म देखी ही नहीं है। पीठ ने कहा, यह फिल्म एक प्रभावशाली व्यक्ति और उसके परिवार के बारे में है।

आपत्तिजनक दृश्य फिल्म से हटाएं

याचिकाकर्ताओं ने दावा किया कि फिल्म घरेलू हिंसा को बढ़ावा देती है, जिस पर पीठ ने कहा, “घरेलू हिंसा एक वास्तविकता है, और यह किसी विशेष धर्म के बारे में नहीं है। यह सभी धर्मों में होता है।” अदालत ने कहा कि ट्रेलर हटा दिया गया है और आपत्तिजनक दृश्य पहले ही फिल्म से हटा दिए गए हैं। अदालत ने कहा कि वास्तव में फिल्म एक “सोचने वाली फिल्म” थी न कि उस तरह की जहां दर्शकों से अपेक्षा की जाती है कि वे “अपने दिमाग को घर पर रखें” और केवल फिल्म का आनंद लें।

पीठ ने आगे कहा, “फिल्म वास्तव में महिलाओं के उत्थान के लिए है। फिल्म में एक मौलाना कुरान की गलत व्याख्या करता है और वास्तव में, एक मुस्लिम व्यक्ति दृश्य में उसी पर आपत्ति जताता है। इसलिए इससे पता चलता है कि लोगों को अपने दिमाग का इस्तेमाल करना चाहिए और आंख मूंदकर इस तरह के मौलानाओं का अनुसरण नहीं करना चाहिए।”बता दें कि यह फिल्म पहले 7 जून और फिर 14 जून को रिलीज होने वाली थी।

सभी पक्ष आपत्तिजनक हिस्सों को हटाने पर सहमत

अदालत ने कहा कि उसके पास कुछ दृश्यों पर कुछ सुझाव हैं जो अभी भी थोड़े आपत्तिजनक हो सकते हैं। पीठ ने कहा कि यदि संबंधित सभी पक्ष आपत्तिजनक हिस्सों को हटाने पर सहमत होते हैं, तो वह बुधवार को फिल्म की रिलीज की अनुमति देने का आदेश पारित करेगी। अदालत ने कहा, “हमें नहीं लगता कि फिल्म में ऐसा कुछ है जो हिंसा भड़काएगा। अगर हमें ऐसा लगता है तो हम इस पर आपत्ति जताने वाले पहले व्यक्ति होंगे। भारतीय जनता इतनी भोली या मूर्ख नहीं है।”

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