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CNG-PNG की कीमतें होंगी कम, हर महीने तय होंगे दाम, केंद्र सरकार ने बदला कीमत तय करने का फॉर्मूला

नई दिल्ली। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 6 अप्रैल को पाइप्ड नेचुरल गैस ( PNG) और कम्प्रेस्ड नेचुरल गैस ( CNG) के दाम तय करने के नए फॉर्मूले को मंजूरी दे दी। गैस की कीमत को इंटरनेशनल मार्केट (international market) में क्रूड के इंडियन बास्केट (Indian Basket) से जोड़ दिया गया। इस फैसले के बाद 8 अप्रैल से CNG और PNG दोनों के दाम कम हो सकते हैं। इससे PNG की कीमत में करीब 10% और CNG की कीमत में 5 से 6 रुपए प्रति किलो की कमी आने का अनुमान है। केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर (Union Minister Anurag Thakur) ने बताया, ‘घरेलू नेचुरल गैस की कीमत को अब अंतरराष्ट्रीय हब गैस की जगह इंपोर्टेड क्रूड के साथ लिंक कर दिया गया है। गैस की कीमत अब भारतीय क्रूड बास्केट (Indian crude basket) के अंतरराष्ट्रीय दाम का 10% होगी। ये हर महीने तय किया जाएगा।’

ये फायदा मिलेगा

  1. नई पॉलिसी से गैस प्रोड्यूसर को बाजार में उतार-चढ़ाव से नुकसान नहीं होगा। गैस की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में भारी बढ़ोतरी से होने वाले नुकसान से कस्टमर्स को छुटकारा मिलेगा।
  2. नए फॉर्मूले के तहत गैस की कीमत तय होने से फर्टिलाइजर और पॉवर सेक्टर को भी सस्ती गैस मिल सकेगी। इससे फर्टिलाइजर सब्सिडी भी कम होगी।
  3. नया फॉर्मूला मोटे तौर पर ओएनजीसी और ऑयल इंडिया की गैस पर लागू होगा। नए कुएं की गैस की कीमत 20% प्रीमियम रखने से ओएनजीसी और ऑयल इंडिया को नए निवेश के लिए बढ़ावा मिलेगा।
  4. नया फॉर्मूला लागू होने से एनर्जी सेक्टर को सस्ती गैस मिलेगी। इसके साथ घरेलू गैस प्रोड्यूसर देश को ज्यादा प्रोडक्शन करने के लिए बढ़ावा मिलेगा।

नया फॉर्मूला तय करने अक्टूबर 2022 में बनाई थी कमेटी

सरकार ने नया फॉर्मूला तय करने के लिए किरीट पारिख की अध्यक्षता में अक्टूबर 2022 में कमेटी बनाई थी। इसी कमेटी की सिफारिशों के आधार पर ही सरकार ने ये फॉर्मूला तैयार किया है। कमेटी ने पुराने फील्ड से निकलने वाली गैस को जनवरी 2026 तक पूरी तरह डी-कंट्रोल करने की सिफारिश की थी। जबकि, मुश्किल क्षेत्रों (डिफिकल्ट फील्ड) से निकलने वाली गैस को जनवरी 2027 तक डी-कंट्रोल करने की सिफारिश की थी। इस डी-कंट्रोल करने वाली सिफारिश पर कैबिनेट के फैसले में चुप्पी साध ली है।

नेशनल स्पेस पॉलिसी 2023 को मिली मंजूरी

बैठक के बाद केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने बताया कि कैबिनेट ने नेशनल स्पेस पॉलिसी 2023 को मंजूरी दे दी है। इस पॉलिसी के तहत इसरो, न्यू स्पेस इंडिया लिमिटेड और प्राइवेट सेक्टर एंटिटीज जैसे ऑर्गेनाइजेशंस का रोल और जिम्मेदारियां तय की गई हैं। उन्होंने कहा कि सरकार ने पहले ही स्पेस जोन को प्राइवेट कंपनियों के लिए खोल दिया था, ताकि इस सेक्टर में भागीदारी को बढ़ावा दिया जा सके।

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