
भोपाल। मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के दतिया विधानसभा उपचुनाव (Datia Assembly By-election) की मतगणना से पहले कांग्रेस (Congress) ने बड़ा संगठनात्मक कदम उठाते हुए पूर्व विधायक राजेंद्र भारती (Rajendra Bharti) को पार्टी से निलंबित (Suspended) कर दिया है। उन पर उपचुनाव के दौरान कांग्रेस प्रत्याशी घनश्याम सिंह के खिलाफ भीतरघात करने के आरोप लगाए गए थे। इस कार्रवाई ने मतगणना से ठीक पहले प्रदेश की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है।
भीतरघात के आरोपों के बाद कार्रवाई
राजेंद्र भारती की विधानसभा सदस्यता समाप्त होने के बाद दतिया सीट पर उपचुनाव कराया गया था। दिल्ली की एक अदालत द्वारा धोखाधड़ी के मामले में तीन वर्ष की सजा सुनाए जाने के बाद उनकी विधायकी समाप्त हो गई थी, जिससे यह सीट रिक्त हुई।
उपचुनाव में कांग्रेस ने घनश्याम सिंह को उम्मीदवार बनाया। चुनाव प्रचार के दौरान उन्होंने सार्वजनिक रूप से आरोप लगाया था कि पार्टी के कुछ नेता उनके खिलाफ काम कर रहे हैं। इन्हीं आरोपों के बाद पार्टी ने राजेंद्र भारती के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की।
मतगणना शुरू
दतिया उपचुनाव की मतगणना सोमवार सुबह 8 बजे से शुरू हुई। जिला निर्वाचन अधिकारी स्वप्निल वानखड़े के अनुसार सबसे पहले डाक मतपत्रों की गिनती की जा रही है, जिसके बाद ईवीएम के मतों की गणना होगी। 30 जुलाई को हुए मतदान में 71.44 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया था।

बीजेपी-कांग्रेस में सीधा मुकाबला
इस उपचुनाव में मुख्य मुकाबला भाजपा के आशुतोष तिवारी और कांग्रेस के घनश्याम सिंह के बीच माना जा रहा है। चुनाव मैदान में कुल 21 उम्मीदवार हैं, जिनमें आजाद समाज पार्टी के दामोदर सिंह यादव भी शामिल हैं। भाजपा ने इस बार पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा को टिकट नहीं दिया। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में राजेंद्र भारती ने नरोत्तम मिश्रा को हराया था।
नतीजों के राजनीतिक मायने
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार दतिया उपचुनाव का परिणाम केवल एक सीट तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसे प्रदेश में दोनों प्रमुख दलों की राजनीतिक स्थिति के संकेत के रूप में भी देखा जाएगा।
यदि कांग्रेस यह सीट बरकरार रखती है तो पार्टी इसे अपने पक्ष में जनसमर्थन का संकेत बताएगी। वहीं भाजपा की जीत को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के नेतृत्व पर जनता की मुहर के रूप में देखा जाएगा। हालांकि, 230 सदस्यीय मध्य प्रदेश विधानसभा में भाजपा के 164 और कांग्रेस के 64 विधायक होने के कारण इस परिणाम से सरकार के बहुमत पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा, लेकिन इसके राजनीतिक संदेश महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।
©2026 Agnibaan , All Rights Reserved