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टेक्सास की 90 फुट हनुमान प्रतिमा पर फिर विवाद, जेसी ह्यूजेस की पोस्ट के बाद हिंदू संगठनों ने जताया विरोध

September 23, 2026

ह्यूस्टन। अमेरिका के टेक्सास (Texas, USA) स्थित शुगर लैंड में श्री अष्टलक्ष्मी मंदिर परिसर (Shri Ashtalakshmi Temple Complex) में स्थापित 90 फुट ऊंची भगवान हनुमान (Lord Hanuman) की प्रतिमा एक बार फिर विवादों के केंद्र में है। कंजर्वेटिव यूट्यूबर और MAGA समर्थक जेसी ह्यूजेस ने सोशल मीडिया पर इस प्रतिमा की तस्वीर साझा करते हुए लिखा, ‘‘जब हम जीतेंगे, तो इसे गिरा देंगे।’’ ह्यूजेस ने अपनी पोस्ट में यह स्पष्ट नहीं किया कि ‘हम’ और ‘जीत’ से उनका आशय किस राजनीतिक संदर्भ से है। उनकी टिप्पणी के बाद हिंदू-अमेरिकी समुदाय, संगठनों और पूर्व सैनिकों की ओर से विरोध दर्ज कराया गया है।

90 फुट की प्रतिमा को लेकर क्या है विवाद?

शुगर लैंड के श्री अष्टलक्ष्मी मंदिर में स्थापित इस प्रतिमा को ‘स्टैच्यू ऑफ यूनियन’ नाम दिया गया है। इसका उद्घाटन अगस्त 2024 में हुआ था। मंदिर से जुड़े लोगों के मुताबिक प्रतिमा शक्ति, भक्ति, सेवा और एकता का प्रतीक है। भगवान राम और सीता को फिर से मिलाने में हनुमान की भूमिका को देखते हुए इसे ‘यूनियन’ नाम दिया गया। प्रतिमा पंचधातु से निर्मित है और इसका वजन करीब 90 टन बताया जाता है। इसके निर्माण में समुदाय से प्राप्त दान का इस्तेमाल किया गया था।

प्रतिमा को लेकर विवाद नया नहीं है। इसके स्थापित होने के बाद कुछ ईसाई कंजर्वेटिव समूहों ने इसकी आलोचना की थी। 2025 में टेक्सास के रिपब्लिकन नेता अलेक्जेंडर डंकन ने भी प्रतिमा को लेकर आपत्ति जताई थी। उन्होंने इसे ‘फॉल्स हिंदू गॉड’ की प्रतिमा बताते हुए अमेरिका को ईसाई राष्ट्र कहा था। उनके बयान पर हिंदू संगठनों ने विरोध दर्ज कराया था।


  • ह्यूजेस की पोस्ट पर पूर्व सैनिक ने दिया जवाब

    जेसी ह्यूजेस की ताजा टिप्पणी के बाद अमेरिकी सेना के पूर्व सैनिक रुचिर बख्शी ने इसका विरोध किया। बख्शी ने कहा कि उन्होंने अमेरिकी सेना में सेवा इसलिए नहीं की कि किसी व्यक्ति को किसी धर्म के पूजा स्थल को निशाना बनाने की बात कहने का अधिकार मिले। उन्होंने अपने सैन्य अनुभव का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने ईसाई, यहूदी, मुस्लिम, नास्तिक और हिंदू सैनिकों के साथ काम किया और किसी ने धर्म के आधार पर भेदभाव नहीं किया।

    बख्शी के मुताबिक अमेरिका में हिंदू समुदाय भी कर चुकाता है, कारोबार करता है और अपने बच्चों को देश की सेना में भेजता है। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर ‘जीत’ का मतलब किसी दूसरे समुदाय के मंदिर को गिराना है, तो यह उस अमेरिका की कल्पना नहीं है जिसके लिए उन्होंने सैन्य सेवा की थी।

    हिंदू संगठन भी समर्थन में उतरे

    कोएलिशन ऑफ हिंदूज ऑफ नॉर्थ अमेरिका (CoHNA) ने भी बख्शी के रुख का समर्थन किया। संगठन ने सोशल मीडिया पर धार्मिक कट्टरता से जुड़ी टिप्पणियों के खिलाफ आवाज उठाने की बात कही। टेक्सास में रहने वाले पूर्व सैनिक और राजनीतिक टिप्पणीकार कार्ल व्हीलेस ने भी ह्यूजेस की टिप्पणी की आलोचना की।

    मामले ने एक बार फिर अमेरिका में धार्मिक स्वतंत्रता, हिंदू-अमेरिकी समुदाय की सार्वजनिक धार्मिक पहचान और राजनीतिक बयानबाजी को लेकर बहस को तेज कर दिया है।

    मिडटर्म चुनाव से पहले बढ़ा राजनीतिक संदर्भ

    ह्यूजेस की टिप्पणी ऐसे समय सामने आई है जब अमेरिका में 2026 के मिडटर्म चुनावों को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हैं। टेक्सास में भारतीय-अमेरिकी समुदाय की बड़ी आबादी है और शुगर लैंड, फ्रिस्को समेत कई इलाकों में हिंदू समुदाय के मंदिर और धार्मिक संस्थान सक्रिय हैं।

    इस विवाद में फिलहाल जेसी ह्यूजेस ने यह स्पष्ट नहीं किया है कि उनकी ‘जीत’ वाली टिप्पणी किस चुनाव या राजनीतिक लक्ष्य से जुड़ी थी। दूसरी ओर, हिंदू संगठनों और समुदाय के सदस्यों ने उनकी पोस्ट को धार्मिक स्थल और हिंदू आस्था को लेकर गंभीर टिप्पणी माना है। विवाद के बीच 90 फुट की हनुमान प्रतिमा एक बार फिर अमेरिका में धर्म, राजनीति और धार्मिक स्वतंत्रता की बहस के केंद्र में आ गई है।

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