नई दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चलाए गए ‘ऑपरेशन हार्डबॉल’ के तहत अमेरिका, कनाडा और यूरोप (America, Canada, Europe) में कथित संगठित अपराध नेटवर्क के खिलाफ की गई कार्रवाई से पहले भारतीय और अमेरिकी जांच एजेंसियों (US investigative agencies) के बीच लंबे समय तक समन्वय और खुफिया सूचनाओं का आदान-प्रदान हुआ। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, भारतीय एजेंसियों ने विदेश मंत्रालय के माध्यम से कई वांछित गैंगस्टरों और उनके नेटवर्क से जुड़ी सत्यापित जानकारी विदेशी एजेंसियों के साथ साझा की थी।
भारत ने साझा की थी सत्यापित जानकारी
रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय जांच एजेंसियों ने पिछले कुछ वर्षों में विभिन्न मामलों की जांच, गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ और तकनीकी निगरानी से जुटाई गई जानकारी अमेरिका और अन्य सहयोगी देशों को उपलब्ध कराई। इसमें कथित तौर पर विदेशों में सक्रिय अपराधियों के संभावित ठिकानों और उनके नेटवर्क से जुड़े इनपुट भी शामिल थे।
सूत्रों के अनुसार, पिछले डेढ़ महीने के दौरान दोनों देशों की एजेंसियों के बीच कई दौर की बैठकें हुईं, जिसके बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर समन्वित कार्रवाई की गई।
अनमोल बिश्नोई के प्रत्यर्पण के बाद बढ़ा सहयोग
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि गैंगस्टर अनमोल बिश्नोई के अमेरिका से भारत प्रत्यर्पण के बाद दोनों देशों की जांच एजेंसियों के बीच सहयोग और बेहतर हुआ। इसी क्रम में अमेरिकी अधिकारियों ने पिछले वर्ष भारत का दौरा कर राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) के अधिकारियों के साथ भी बैठक की थी।
बताया जाता है कि इस दौरान संगठित अपराध, ड्रग्स तस्करी और अंतरराष्ट्रीय गैंग नेटवर्क से जुड़े मामलों में सूचनाओं के आदान-प्रदान पर विशेष जोर दिया गया।
जांच एजेंसियों के अनुसार, कई मामलों में यह संकेत मिले कि विदेशों में सक्रिय कुछ अपराधी भारत में मादक पदार्थों की तस्करी और अन्य आपराधिक गतिविधियों के लिए अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क के संपर्क में थे। जांच में ड्रोन, समुद्री मार्ग, एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग प्लेटफॉर्म और वीपीएन जैसी तकनीकों के इस्तेमाल की भी जानकारी सामने आई, जिनके जरिए गतिविधियों को छिपाने की कोशिश की जाती थी।
अंडरकवर ऑपरेशन से जुटाए गए सबूत
अमेरिकी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, इस पूरे अभियान की तैयारी वर्ष 2023 से शुरू हुई थी। अमेरिकी जांच एजेंसियों ने अंडरकवर अधिकारियों और गोपनीय मुखबिरों की मदद से कथित ड्रग्स तस्करी, हथियारों की खरीद-फरोख्त और वसूली से जुड़े नेटवर्क की निगरानी की।
रिपोर्ट के मुताबिक, एक गोपनीय मुखबिर और एक अंडरकवर अधिकारी ने कई महीनों तक संदिग्ध नेटवर्क के संपर्क में रहकर इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड, वित्तीय लेनदेन और अन्य साक्ष्य जुटाए। इन्हीं सूचनाओं के आधार पर विभिन्न मामलों में आरोप-पत्र तैयार किए गए।
चरणबद्ध तरीके से दाखिल हुई चार्जशीट
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिकी एजेंसियों ने अलग-अलग आपराधिक नेटवर्क के खिलाफ क्रमवार चार्जशीट दाखिल की। इसके बाद ‘ऑपरेशन हार्डबॉल’ के तहत अमेरिका, कनाडा और यूरोप में एक साथ कई स्थानों पर कार्रवाई की गई।
बताया जा रहा है कि इस अभियान का उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय संगठित अपराध नेटवर्क, ड्रग्स तस्करी और कथित उगाही के मामलों में शामिल लोगों के खिलाफ समन्वित कार्रवाई करना था।
जांच अभी भी जारी
अधिकारियों के अनुसार, इस पूरे मामले की जांच अभी जारी है। विभिन्न देशों की कानून प्रवर्तन एजेंसियां आपस में समन्वय बनाकर वित्तीय लेनदेन, अंतरराष्ट्रीय संपर्कों और आपराधिक नेटवर्क से जुड़े अन्य पहलुओं की भी जांच कर रही हैं। आने वाले समय में जांच के आधार पर और गिरफ्तारियां या कानूनी कार्रवाई होने की संभावना से इनकार नहीं किया गया है।
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