वॉशिंगटन। नाटो शिखर सम्मेलन (NATO Summit) से अमेरिका लौटते समय राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की यात्रा को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई। रिपोर्टों के अनुसार, ट्रंप ने यात्रा के दौरान कतर की ओर से उपलब्ध कराए गए नए बोइंग 747-8 विमान (New Boeing 747-8 aircraft) की जगह पारंपरिक एयर फोर्स वन (air Force One) से आगे का सफर तय किया। इस फैसले के बाद सुरक्षा कारणों को लेकर कई तरह की अटकलें लगाई गईं, हालांकि व्हाइट हाउस ने इन्हें खारिज कर दिया।
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, ट्रंप तुर्किये में आयोजित नाटो शिखर सम्मेलन से लौट रहे थे। इस दौरान ब्रिटेन के आरएएफ मिल्डेनहॉल एयरबेस पर संक्षिप्त ठहराव के बाद उन्होंने विमान बदला और पुराने एयर फोर्स वन से अमेरिका के लिए रवाना हुए।
इस घटनाक्रम ने ऐसे समय ध्यान खींचा है, जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ा हुआ है।
द न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट में दावा किया गया कि अमेरिकी सीक्रेट सर्विस ने एहतियात के तौर पर राष्ट्रपति को विमान बदलने की सलाह दी थी। रिपोर्ट के अनुसार, कतर से मिले नए विमान में अभी वे सभी विशेष सुरक्षा प्रणालियां पूरी तरह स्थापित नहीं हुई हैं, जो राष्ट्रपति के आधिकारिक एयर फोर्स वन में मौजूद रहती हैं।
हालांकि, व्हाइट हाउस ने इस दावे से सहमति नहीं जताई। प्रशासन का कहना है कि नया विमान भी उच्च स्तर के सुरक्षा मानकों के अनुरूप है और राष्ट्रपति की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक प्रोटोकॉल अपनाए गए हैं।
पत्रकारों से बातचीत में ट्रंप ने सुरक्षा संबंधी अटकलों को खारिज करते हुए कहा कि उन पर हमेशा खतरा बना रहता है, लेकिन विमान बदलने का फैसला सुरक्षा कारणों से नहीं था।
उन्होंने बताया कि ब्रिटेन में रुकने का उद्देश्य वहां तैनात अमेरिकी सैनिकों को नया विमान दिखाना था। ट्रंप ने नए जेट की तारीफ करते हुए उसे “बेहद शानदार” बताया और कहा कि सैन्यकर्मी भी उसे देखकर उत्साहित थे।
उन्होंने यह भी कहा कि पुराने एयर फोर्स वन से यात्रा करने का एक कारण पुरानी यादों को ताजा करना भी था।
रिपोर्टों के अनुसार, पुराने एयर फोर्स वन में मौजूद पत्रकारों को उड़ान के दौरान खिड़कियों के ब्लाइंड्स बंद रखने के निर्देश दिए गए थे। हालांकि ट्रंप ने कहा कि यह प्रतिबंध उनके निजी हिस्से पर लागू नहीं था।
इस पूरे घटनाक्रम के बाद विमान बदलने को लेकर अलग-अलग तरह की चर्चाएं जरूर तेज हुईं, लेकिन अमेरिकी प्रशासन ने दोहराया है कि राष्ट्रपति की सुरक्षा को लेकर सभी आवश्यक व्यवस्थाएं पहले से लागू थीं और यात्रा के दौरान किसी विशेष खतरे की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
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