
उज्जैन। खाराकुआ स्थित बड़ा उपाश्रय में गत दिवस नाकोड़ा भैरव की भक्ति की गई और छप्पन भोग लगाए गए। यहां विराजित साध्वी उपेन्द्रयशाश्रीजी की मौजूदगी में श्रद्धालुओं ने नाकोड़ा भैरव देव की आराधना करते हुए विधि-विधान से पूजन किया। इस अवसर पर नाकोड़ा भैरव देव को 56 भोग अर्पित किए गए।
धार्मिक आयोजन के दौरान पूजन के साथ नाकोड़ा भैरव देव के प्रति श्रद्धा व्यक्त की गई। 56 भोग की आकर्षक साज-सज्जा ने श्रद्धालुओं का ध्यान आकर्षित किया। इस अवसर पर साध्वीश्री ने कहा कि मनुष्य संसार में सुख की तलाश में निरंतर भटकता रहता है। उसे लगता है कि धन, संपत्ति, पद और भौतिक सुविधाओं से जीवन में स्थायी सुख प्राप्त हो जाएगा, लेकिन संसार का सुख क्षणिक है। साध्वीश्री ने कहा कि जीवन में जो मिला है, वह हमेशा साथ रहने वाला नहीं है। मनुष्य धन और सांसारिक साधनों को अपना समझकर उनसे मोह कर लेता है, लेकिन समय के साथ सब कुछ बदल सकता है। इसलिए मनुष्य को बाहरी सुख-सुविधाओं के बजाय अपने भीतर के सुख की तलाश करनी चाहिए। धर्म, संयम, सदाचार, सेवा और अच्छे कर्म ही मनुष्य के जीवन को सार्थक बनाते हैं।