
जबलपुर। यात्रियों की सुविधा के लिए दीनदयाल स्थित आईएसबीटी का निर्माण इस उद्देश्य से किया गया था कि अलग-अलग रूट की बसें एक ही स्थान से मिलें और यात्रियों को बसों के इंतजार में परेशानी न हो। लेकिन मौजूदा हालात में यहां की व्यवस्थाएं यात्रियों की सुविधा के बजाय अतिक्रमण की समस्या से घिरी नजर आ रही हैं। आईएसबीटी परिसर में दुकानदारों द्वारा निर्धारित जगह से आगे बढ़कर सामान और दुकान का विस्तार किए जाने से यात्रियों के लिए उपलब्ध स्थान प्रभावित हो रहा है। कई जगहों पर आने-जाने और बैठने की जगह तक दुकानों के सामान से घिरी नजर आती है। ऐसे में बसों का इंतजार करने वाले यात्रियों को बैठने के लिए पर्याप्त स्थान नहीं मिल पा रहा है।
तय सीमा के बाद भी विस्तार, जिम्मेदार कौन?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब दुकानों के लिए आईएसबीटी परिसर में जगह और सीमाएं निर्धारित हैं, तो फिर दुकानदारों को उससे आगे बढऩे की अनुमति कैसे मिल रही है? यदि यह अतिक्रमण जिम्मेदार अधिकारियों की नजर में है तो कार्रवाई क्यों नहीं हो रही और यदि नजर में नहीं है तो नियमित निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है। आईएसबीटी में रोजाना बड़ी संख्या में यात्री पहुंचते हैं। इनमें बुजुर्ग, महिलाएं, बच्चे और दूरदराज से आने वाले लोग भी शामिल हैं। ऐसे में यात्रियों के लिए निर्धारित स्थान पर दुकान का विस्तार उनकी सुविधा को सीधे प्रभावित करता है।
अतिक्रमण पर कार्रवाई क्यों नहीं?
यदि दुकानदारों ने तय सीमा से बाहर कब्जा किया है तो जिम्मेदार विभाग को नियमानुसार कार्रवाई करनी चाहिए। लेकिन कार्रवाई नहीं होने से सवाल उठ रहा है कि आखिर इस अतिक्रमण को रोकने की जिम्मेदारी किसकी है? क्या जिम्मेदारों को स्थिति दिखाई नहीं दे रही, या फिर सब कुछ देखकर भी अनदेखा किया जा रहा है? आईएसबीटी यात्रियों की सुविधा के लिए बनाया गया है, लेकिन यदि यात्री ही बैठने और आने-जाने की जगह के लिए परेशान हों तो व्यवस्था की उपयोगिता पर सवाल उठना स्वाभाविक है। अब जरूरत केवल अतिक्रमण हटाने की नहीं, बल्कि यह स्पष्ट करने की भी है कि निर्धारित सीमाओं के उल्लंघन पर अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई और निगरानी की जिम्मेदारी निभाने वाले अधिकारी क्या कर रहे हैं।
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