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क्या नेपाल ने भारतीय जमीन पर किया कब्जा? सीमा विवाद पर भारत सरकार ने दी सफाई, गंडक नदी का बताया कनेक्शन

June 03, 2026

नई दिल्ली! भारत-नेपाल सीमा (India-Nepal border) को लेकर हाल में उठे दावों के बाद दोनों देशों के रिश्तों और सीमा विवाद पर नई बहस शुरू हो गई है। नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन्द्र ‘बालेन’ शाह (Balendra ‘Balen’ Shah) के बयान के बाद भारत सरकार ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि सीमा से जुड़े मुद्दों को बढ़ा-चढ़ाकर देखने की जरूरत नहीं है और अधिकांश सीमा का सीमांकन पहले ही पूरा किया जा चुका है।

नेपाल के प्रधानमंत्री के बयान से मचा विवाद
नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह ने संसद में बोलते हुए दावा किया कि सीमा विवाद केवल एकतरफा नहीं है। उनके मुताबिक, कुछ स्थानों पर नेपाल द्वारा भारतीय क्षेत्र में अतिक्रमण के मामले भी सामने आए हैं। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि ऐतिहासिक पृष्ठभूमि को देखते हुए इस विवाद के समाधान में ब्रिटेन और चीन जैसे देशों की भूमिका पर विचार किया जा सकता है।

शाह का कहना था कि 1816 की सुगौली संधि के आधार पर तय हुई सीमाओं से जुड़े कई प्रश्न अब भी पूरी तरह सुलझ नहीं पाए हैं, इसलिए इस पर व्यापक बातचीत की जरूरत है।



  • भारत ने तीसरे पक्ष की भूमिका खारिज की
    नेपाल के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने स्पष्ट किया कि भारत-नेपाल सीमा का मामला पूरी तरह द्विपक्षीय है और इसमें किसी तीसरे देश की भूमिका स्वीकार्य नहीं है।

    उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच मौजूद सीमा विवादों के समाधान के लिए पहले से संस्थागत तंत्र मौजूद हैं और बातचीत के जरिए ही सभी मुद्दों को सुलझाया जाएगा।

    गंडक नदी से कैसे जुड़ा है मामला?
    विदेश मंत्रालय के अनुसार, सीमा से जुड़े कुछ विवाद प्राकृतिक कारणों से भी पैदा हुए हैं। खासकर गंडक नदी जैसी सीमावर्ती नदियों के बहाव में समय-समय पर बदलाव होने से कुछ क्षेत्रों में भ्रम की स्थिति बनी है।

    विशेषज्ञों के मुताबिक, नदी का रास्ता बदलने पर सीमा चिह्नों और जमीन की स्थिति प्रभावित हो सकती है, जिससे कुछ हिस्सों में ‘नो-मैन्स लैंड’ या अनिर्धारित क्षेत्र को लेकर विवाद खड़ा होता है।

    98% सीमा पहले ही तय
    भारत सरकार ने बताया कि भारत और नेपाल के बीच करीब 98 प्रतिशत सीमा का सीमांकन पहले ही हो चुका है। केवल कुछ हिस्सों में तकनीकी और स्थानीय स्तर के विवाद बाकी हैं, जिनके समाधान के लिए दोनों देशों के बीच बातचीत जारी है।

    विदेश मंत्रालय ने यह भी माना कि कुछ इलाकों में ‘नो-मैन्स लैंड’ पर अतिक्रमण के मामले सामने आए हैं, लेकिन इसके समाधान के लिए दोनों देशों के पास स्थापित द्विपक्षीय व्यवस्था मौजूद है।

    फिलहाल, भारत ने साफ संकेत दिया है कि सीमा विवाद को लेकर किसी बाहरी मध्यस्थता की जरूरत नहीं है और यह मसला आपसी संवाद से ही हल किया जाएगा।

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