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अपराध से कला तक पहुंचे हाथ, अब गढ़ रहे गणेश

September 10, 2026

  • जेल में 12 बंदियों ने एक माह में तैयार कीं 150 मिट्टी-गोबर की प्रतिमाएं, विसर्जन के बाद तुलसी बनकर देंगी जीवन

जबलपुर। कभी अपराध की राह पर बढ़े हाथ अब आस्था, कला और पर्यावरण संरक्षण की तस्वीर गढ़ रहे हैं। सुभाष चंद्र बोस केंद्रीय कारागार में सजा काट रहे बंदियों ने गणेश उत्सव के लिए मिट्टी, गोबर और तुलसी के बीज से इको-फें्रडली गणेश प्रतिमाएं तैयार की हैं। खास बात यह है कि इन प्रतिमाओं का विसर्जन करने के बाद ये कचरे में तब्दील होने के बजाय तुलसी के पौधे के रूप में नया जीवन देंगी।



  • गणेश चतुर्थी को देखते हुए जेल में 12 प्रशिक्षित बंदियों की टीम ने करीब एक माह तक मेहनत कर 150 प्रतिमाएं तैयार की हैं। लगभग एक फीट आकार की इन प्रतिमाओं में मिट्टी, गोबर और तुलसी के बीज का इस्तेमाल किया गया है। प्रतिमाओं को आकर्षक रूप देने के लिए वाटरप्रूफ रंगों से सजाया गया है। घरों में छोटी गणेश प्रतिमा स्थापित करने के चलन को ध्यान में रखते हुए इनका आकार करीब एक फीट रखा गया है। 500 रुपए में मिल रही प्रतिमा, राशि जाएगी बंदी कल्याण कोष में: इन इको-फ्रेंडली प्रतिमाओं को लोगों का अच्छा रिस्पॉन्स मिल रहा है। जेल के बाहर प्रतिदिन सुबह 10 से शाम 5 बजे तक स्टॉल लगाया जा रहा है, जहां श्रद्धालु उचित राशि देकर प्रतिमाएं खरीद सकते हैं। एक प्रतिमा की कीमत करीब 500 रुपए रखी गई है। इनकी बिक्री से प्राप्त राशि बंदी कल्याण कोष में जमा की जाएगी।

    हुनर ने बदली सोच, जेल से बाहर भी रोजगार की उम्मीद

    • 12 बंदियों की टीम ने करीब 150 प्रतिमाएं तैयार की।
    • प्रतिमा निर्माण में अमर यादव सहित झल्लू यादव, श्रीवास्तव और अन्य बंदी शामिल हैं।
    • करीब 3 साल से जेल में बंद अमर यादव समेत इन बंदियों ने मूर्तिकला और हस्तशिल्प के काम में रुचि दिखाई है।
    • बंदियों का कहना है कि इस तरह के काम से उन्हें अपनी जिंदगी को नई दिशा देने का अवसर मिला है।
    • कई बंदी जेल से बाहर निकलने के बाद इसी हुनर को रोजगार का जरिया बनाकर सम्मानजनक जीवन शुरू करना चाहते हैं।

    काष्ठकला से पावरलूम तक सिखाए जा रहे कई हुनर
    जेल प्रशासन बंदियों को केवल सजा काटने तक सीमित रखने के बजाय उन्हें हुनरमंद बनाने की दिशा में भी काम कर रहा है। जेल में काष्ठकला, फैब्रिकेशन, हथकरघा, पावरलूम, दरी और स्टेशनरी निर्माण जैसे कार्यों का प्रशिक्षण दिया जाता है। बंदियों द्वारा गमछा, टॉवल, दरी, कारपेट सहित विभिन्न हस्तनिर्मित सामग्री भी तैयार की जाती है।

    जो हाथ अपराध की ओर बढ़े, अब सुधार की दिशा में काम कर रहे
    जेल उप अधीक्षक मदन कमलेश ने बताया कि गणेश उत्सव को देखते हुए इस वर्ष भी बंदियों ने इको-फे्रंडली गणेश प्रतिमाएं तैयार की हैं। 12 बंदियों की टीम ने करीब एक महीने में 150 प्रतिमाएं बनाई हैं। उन्होंने कहा कि पहले जो हाथ अपराध की ओर बढ़ते थे, अब वही हाथ सुधार और रचनात्मकता की दिशा में काम कर रहे हैं। बंदियों ने पूरी मेहनत और लगन से प्रतिमाएं तैयार की हैं। करीब 500 रुपए में बिकने वाली प्रतिमाओं से प्राप्त राशि बंदी कल्याण कोष में जमा की जाएगी। जेल प्रशासन के अनुसार, बंदियों को अलग-अलग विधाओं में प्रशिक्षण देने का उद्देश्य उन्हें सजा के साथ सुधार और पुनर्वास का अवसर देना है, ताकि जेल से बाहर निकलने के बाद वे सीखे हुए हुनर के जरिए सम्मानजनक तरीके से अपना जीवन शुरू कर सकें।

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