
जबलपुर। जिले में इन दिनों वायरल, सर्दी-बुखार, मलेरिया, डेंगू, चिकनगुनिया और उल्टी-दस्त जैसी बीमारियों के मरीजों की संख्या बढऩे के बीच सरकारी अस्पतालों में दवाओं की उपलब्धता को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। जिला अस्पताल, सिविल अस्पताल और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में मरीजों की लंबी कतारें लग रही हैं, वहीं कई जरूरी दवाएं दवा काउंटर पर उपलब्ध नहीं होने की शिकायतें सामने आ रही हैं। इनमें पैरासिटामॉल और कफ सिरप सहित सामान्य रूप से इस्तेमाल होने वाली दवाएं भी शामिल हैं।
भोपाल से आपूर्ति, लेकिन जरूरत के मुकाबले कम
स्वास्थ्य विभाग से जुड़े सूत्रों के अनुसार अस्पतालों को भोपाल स्तर से दवाओं की आपूर्ति की जा रही है, लेकिन वर्तमान मरीज भार को देखते हुए यह मात्रा पर्याप्त नहीं मानी जा रही है। अस्पताल प्रबंधन के सामने समस्या यह है कि उपलब्ध दवाओं का उपयोग अस्पताल में आने वाले मरीजों के अलावा विभिन्न स्वास्थ्य शिविरों में भी किया जा रहा है।
शिविरों का बढ़ता दायरा भी बना चुनौती
जिले में जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संस्थाओं की ओर से लगातार स्वास्थ्य शिविर आयोजित किए जा रहे हैं। इन शिविरों में सरकारी अस्पतालों से डॉक्टर, नर्स और पैरामेडिकल स्टाफ की टीमें भेजी जाती हैं। शिविर में चिकित्सकों द्वारा लिखी जाने वाली कई दवाएं भी सरकारी अस्पतालों के स्टॉक से उपलब्ध कराई जाती हैं। सूत्रों के मुताबिक महीने में कई शिविर आयोजित होने से दवाओं की खपत बढ़ रही है।
अस्पतालों के नियमित मरीजों पर पड़ रहा असर
जानकारों का कहना है कि यदि पूरे जिले में वर्षभर आयोजित होने वाले स्वास्थ्य शिविरों में हजारों मरीज पहुंचते हैं तो उनके लिए उपलब्ध कराई जाने वाली दवाओं का भार भी सरकारी अस्पतालों के बजट और स्टॉक पर पड़ता है। ऐसे में अस्पतालों के नियमित मरीजों के लिए दवाओं की उपलब्धता प्रभावित होने की आशंका रहती है। चिकित्सा अधिकारियों ने सीधे तौर पर दवाओं की कमी पर टिप्पणी करने से परहेज किया, लेकिन यह स्वीकार किया कि मौजूदा परिस्थितियों में दवाओं की आवश्यकता को देखते हुए भोपाल स्तर से आपूर्ति का दायरा बढ़ाए जाने की जरूरत है। अब सवाल यह है कि जब बीमारियां बढ़ रही हैं और अस्पतालों में मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है, तो दवाओं की उपलब्धता उसी अनुपात में क्यों नहीं बढ़ाई जा रही है।
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