
जबलपुर। शहर में आधारभूत ढांचे को मजबूत करने के लिए मंजूर किए गए कई प्रमुख पुल और सड़क निर्माण कार्य भारी प्रशासनिक देरी का शिकार हो चुके हैं। डुमना विमानतल पहुंच मार्ग, पेंटीनाका-चर्च क्षेत्र फ्लाईओवर तथा नर्मदा नदी पर स्थित लम्हेटा-लम्हेटी ब्रिज जैसी अहम योजनाएं स्वीकृत बजट के बावजूद जमीन की अनुपलब्धता और तकनीकी अनुमतियों के भंवर में फंसी हैं। लोक निर्माण विभाग, छावनी परिषद, रक्षा संपदा विभाग और सेना के मध्य औपचारिक सहमति न बन पाने से विकास की गति पूरी तरह रुक गई है। वर्ष 2021 से स्वीकृत डुमना मार्ग 5 साल से सैन्य मंजूरी की प्रतीक्षा में अधूरा पड़ा है। उधर पेंटीनाका चौराहे पर बनने वाले नए पुल की संशोधित रूपरेखा तैयार होने के बाद सेना से जमीन हस्तांतरण की प्रक्रिया दिल्ली स्तर पर लंबित है। इसी प्रकार लगभग 190 करोड़ रुपये के वित्तीय प्रावधान वाला लम्हेटा पुल 4 वर्षों के निर्माण कार्य के उपरांत भी आवागमन हेतु प्रारंभ नहीं किया जा सका है।
सैन्य क्षेत्र की मंजूरी बिना डुमना मार्ग अधूरा
डुमना एयरपोर्ट तक सुगम आवागमन सुनिश्चित करने के उद्देश्य से वर्ष 2021 में लगभग 70 करोड़ रुपये की लागत वाली 11 किलोमीटर लंबी सड़क चौड़ीकरण परियोजना शुरू की गई थी। संबंधित निर्माण विभाग ने हवार्इ अड्डे की दिशा से 6.5 किलोमीटर हिस्से का निर्माण तो पूर्ण कर लिया, किंतु शेष 4.5 किलोमीटर का मार्ग रक्षा विभाग के स्वामित्व वाली भूमि की परिधि में आता है। लोक निर्माण विभाग द्वारा रक्षा भूमि के उपयोग की औपचारिक अनुमति का प्रस्ताव करीब 2 वर्ष पूर्व भोपाल स्थित सक्षम प्राधिकारी को भेजा गया था। लंबे समय से यह आवश्यक स्वीकृति अप्राप्त रहने के कारण इस सामरिक मार्ग का चौड़ीकरण कार्य पूरी तरह ठप पड़ा है।
लगातार बढ़ती जा रही लागत
सदर, राइट टाउन, गढ़ा, मदनमहल और मुख्य रेलवे स्टेशन की ओर जाने वाले व्यस्त मार्गों पर जाम समाप्त करने के लिए एम्पायर टॉकीज चौक-पेंटीनाका-चर्च क्षेत्र फ्लाईओवर की रूपरेखा बनाई गई थी। शुरुआत में इस परियोजना का अनुमानित बजट करीब 45 करोड़ निर्धारित था। बाद में यातायात सर्वे, तकनीकी परीक्षण और डिजाइन में संशोधन के चलते लंबाई बढ़ा दी गई, जिससे लागत बढ़कर करीब 70 करोड़ रुपये तक पहुंच गई। नए नक्शे के अनुसार अब सेना व रक्षा संपदा विभाग से करीब 4 हेक्टेयर अतिरिक्त जमीन की आवश्यकता उत्पन्न हो गई है। संयुक्त बैठकों के उपरांत प्रस्ताव दिल्ली भेजा गया, किंतु अंतिम स्वीकृति के अभाव में निर्माण एजेंसी तय होने के बाद भी काम नहीं बढ़ा।
लम्हेटा और सगड़ा निर्माण बेहद सुस्त
नर्मदा नदी पर लम्हेटा से लम्हेटी के मध्य आवागमन को जोडऩे के लिए लगभग 180 करोड़ रुपये की लागत से निर्माणाधीन पुल पिछले 4 वर्षों से सुस्त कार्यप्रणाली का दंश झेल रहा है। लम्हेटी छोर की ओर सड़क से मिलान और अन्य तकनीकी कार्य बाकी रहने के कारण इसके अगले वर्ष तक ही शुरू होने की संभावना जताई जा रही है। दूसरी ओर, सगड़ा फ्लाईओवर परियोजना भी निर्माण की धीमी गति और गुणवत्ता से जुड़ी शिकायतों से घिरी हुई है। करीब 3 वर्ष पूर्व स्वीकृत और 1 वर्ष पूर्व भूमिपूजन के बाद आरंभ हुए इस कार्य में पर्याप्त सर्विस रोड न बनाए जाने से दुर्घटनाओं का निरंतर जोखिम बना रहता है।
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