भोपाल न्यूज़ (Bhopal News)

आज कराए जांएगे जोन समितियों के चुनाव

  • हंगामे की भेंट चढ़ गये जनता के मुद्दे, बिना चर्चा जोन पुनर्गठन का प्रस्ताव भी पारित

भोपाल। भले ही नगर निगम की परिषद की बैठक करीब 3 साल बाद हुई, लेकिन जनता के मुद्दे एक बार फिर हंगामे की भेंट चढ़ गये। लिहाजा अध्यक्ष के खिलाफ नारेबाजी, आसंदी का घेराव और गर्भगृह में विपक्षी दल कांग्रेस के धरने के बीच निगम परिषद की पहली बैठक निपट गई। यह बात जरूर है कि इस दौरान भाजपा एक सूत्रीय एजेंडे के तहत लाये गए जोन पुनर्गठन के प्रस्ताव को बहुमत के बल पर पारित कराने में सफल रही। बावजूद इसके कांग्रेस ने प्रस्ताव की वैधता पर सवाल खड़े करते हुए हाईकोर्ट में चुनौती देने का ऐलान किया है। वहीं नगर निगम द्वारा पुनर्गठित जोन की समितियों के चुनाव आज कराए जाएंगे। एक से लेकर जोन 19 निर्वाचन प्रक्रिया के जहां शाम 4 बजे से समय तय किया गया। वहीं दूसरी ओर नवगठित जोन क्रमांक 20 और 21 में यह प्रक्रिया शाम साढ़े चार बजे से शुरू होगी। जोन 20 के चुनाव संत हिरदाराम नगर जोन कार्यालय क्रमांक एक में और 21 के भदभदा रोड स्थिति डॉ भीमराव अंबेडकर भवन में होंगे।
मंगलवार को महापौर मालती राय की मौजूदगी में संपत्तिकर और जलदर के मुद्दे पर नेता प्रतिपक्ष शबिस्ता जकी के नेतृत्व में कांग्रेसी पार्षदों ने शहर सरकार को जमकर घेरा। हाथों में बढ़ा हुआ कर वापस लो जैसे नारे लिखे पोस्टर लेकर आसंदी में आसीन अध्यक्ष किशन सूर्यवंशी के सामने खड़े हो गए। पूरे समय में यह स्थिति 3 बार बनी, जब मुकाबले में बीजेपी पार्षद भी गर्भ गृह में आ गये। विपक्ष के आक्रामक रवैये को देखते हुए अध्यक्ष ने नेता प्रतिपक्ष को तय स्थान से अपनी बात रखने के लिये कहा, लेकिन कोई फर्क दिखाई नहीं पड़ा। इस बीच बहुमत के आधार पर 19 के बजाय 21 जोन समितियों के प्रस्ताव को एमआईसी सदस्य रविंद्र यती ने शोर-शराबे के बीच पेश किया और अध्यक्ष ने ध्वनिमत से इसे पारित कर दिया। श्रद्धांजलि और राष्ट्रगान के बीच सभा अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई। बैठक में निगम आयुक्त केवीएस चौधरी के अलावा पहली बैठक की कार्यवाही देखने पूर्व अध्यक्ष सुरजीत सिंह चौहान भी पहुंचे थे।


ऐसे बढ़ा हंगामा
निगम परिषद की बैठक तय समय 12 बजे से करीब आधा घंटे की देरी से शुरू हुई। आसंदी संभालते ही निगम अध्यक्ष ने अपनी बात रखी और और जैसे ही महापौर मालती राय का नाम पुकारा, नेता प्रतिपक्ष ने संक्षेपिका को लेकर आपत्ति जताई। अध्यक्ष ने शांति बनाये रखने का अनुरोध किया बावजूद इसके संपत्ति और जल की बढ़ी दरों का मुद्दा उठाते हुए इसे जनहित में वापस लेने की मांग दूसरे पार्षद भी करने लगे। शोरशराबा बढ़ता देख अध्यक्ष ने करीब आधे घंटे के लिये बैठक स्थगित कर दी और आसंदी छोड़कर अपने कक्ष में चले गये। इसके बाद जब बैठक 1:10 पर पुन: शुरू हुई तो विपक्ष ने फिर हंगामा शुरू कर दिया। पहले दो बार आसंदी घेरी और उसके बाद धरना दे दिया। इसके पहले एमआईसी सदस्य रविंद्र यति, मनोज राठौर और राजेश हिंगोरानी ने महापौर के भाषण से पहले हंगामे को गलत बताया है।

21 जोन बने पर पुनर्गठन को लेकर रार
जोन पुर्नगठन के प्रस्ताव को मंजूरी मिल गई है। इसके बाद राजधानी में जोनो की संख्या बढ़कर 21 हो गई है। बावजूद इसके रार जारी है। 20 और 21 नये जोन होंगे। नेता प्रतिपक्ष शबिस्ता जकी का आरोप है कि बहुुमत का बेजा इस्तेमाल करते हुए जोन पुर्नगठन में नगर पालिक अधिनियम 1956 की धारा 48 क के बिंदु 2, 3 और 4 का उल्लंघन किया गया है। क्योंकि मौजूदा जनसंख्या के मुताबिक प्रति एक लाख के हिसाब से राजधानी में 25 जोन बनाये जाने चाहिये। इससे जनता का नुकसान है। इस मामले को हम न्यायालय लेकर जाएंगे।

 

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