
सागर। मध्य प्रदेश के बुंदेलखंड अंचल की बेटियों ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। सागर जिले की रहने वाली यामिनी मौर्य ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 की जूडो की 57 किलोग्राम भार वर्ग स्पर्धा में शानदार प्रदर्शन करते हुए रजत पदक अपने नाम किया है। एक साधारण किसान परिवार से निकलकर इस मुकाम तक पहुंची यामिनी की यह उपलब्धि संघर्ष, लगन और अटूट संकल्प की मिसाल बन गई है।
यामिनी ने पूरे टूर्नामेंट में आक्रामक और शानदार प्रदर्शन करते हुए फाइनल में जगह बनाई। स्वर्ण पदक के लिए हुए रोमांचक और कड़े मुकाबले में उन्हें हार का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने भारत की झोली में रजत पदक डालकर देश और मध्य प्रदेश का गौरव बढ़ाया।
यामिनी की सफलता के पीछे वर्षों की मेहनत, अनुशासन और परिवार का त्याग छिपा है। सागर के पुरानी सदर निवासी छोटे किसान हरिओम मौर्य की सबसे बड़ी बेटी यामिनी ने शुरुआती शिक्षा सरकारी स्कूल से प्राप्त की। बुंदेलखंड जैसे क्षेत्र में खेल सुविधाओं की कमी के बावजूद उन्होंने सीमित संसाधनों में अभ्यास शुरू किया। यामिनी की प्रतिभा को सबसे पहले उनके शुरुआती कोच दीपक कुमार ने पहचाना। उन्होंने यामिनी के पिता को स्थानीय खेल परिसर में प्रशिक्षण दिलाने की सलाह दी। कोच की सलाह पर परिवार ने बेटी को आगे बढ़ने का अवसर दिया और आज उसकी मेहनत का परिणाम पूरे देश के सामने है।
अभ्यास के दौरान एक समय ऐसा भी आया जब यामिनी का पैर टूट गया। डॉक्टरों और खेल विशेषज्ञों ने उनके करियर पर संकट की आशंका जताई, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। लंबी रिकवरी के बाद यामिनी ने पहले से अधिक मेहनत की और दमदार वापसी करते हुए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश के लिए पदक जीत लिया।
यामिनी के पिता छोटे किसान हैं। आर्थिक तंगी के बावजूद उन्होंने बेटी के सपनों से समझौता नहीं किया। बेहतर प्रशिक्षण के लिए जब यामिनी को बाहर भेजने की बात आई तो परिवार ने सभी कठिनाइयों को पीछे छोड़ते हुए उनका पूरा साथ दिया। यही भरोसा आज उनकी सबसे बड़ी ताकत बन गया।
शुक्रवार रात सागर स्थित यामिनी के घर में उत्सव जैसा माहौल रहा। पूरा परिवार और पड़ोसी टीवी स्क्रीन पर नजरें टिकाए बैठे थे। जैसे ही रजत पदक पक्का हुआ, घर में खुशी की लहर दौड़ गई। खेल प्रेमियों, जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों ने परिवार को बधाई दी। यामिनी के पिता हरिओम मौर्य ने कहा, “हमें अपनी बेटी पर गर्व है। इस बार स्वर्ण पदक भले ही नहीं मिल पाया, लेकिन हमें पूरा विश्वास है कि आगामी एशियन गेम्स और अन्य अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में वह देश के लिए स्वर्ण पदक जरूर जीतेगी। यामिनी मौर्य की यह उपलब्धि केवल सागर या मध्य प्रदेश की नहीं, बल्कि देश की उन सभी बेटियों के लिए प्रेरणा है, जो सीमित संसाधनों और विपरीत परिस्थितियों के बावजूद अपने सपनों को साकार करने का साहस रखती हैं।
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