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राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में पहली FIR दर्ज…. 8 लोग नामजद, जानें किस पर क्या लगे आरोप?

June 26, 2026

अयोध्या। अयोध्या (Ayodhya) के राम मंदिर (Ram Mandir) में चढ़ावे को लेकर सामने आया कथित गड़बड़ी का मामला अब जांच के सबसे अहम दौर में पहुंच गया है. पहली बार श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट (Shri Ram Janmabhoomi Teerth Kshetra Trust) की शिकायत पर एफआईआर (FIR) दर्ज हुई है. आठ लोगों को नामजद किया गया है, कई अन्य अज्ञात आरोपी भी जांच के दायरे में हैं और SIT अब उनकी संपत्तियों, बैंक खातों और कथित लेन-देन की पड़ताल कर रही है. आखिर ये लोग कौन हैं? मंदिर में किसकी क्या जिम्मेदारी थी? और किस पर क्या आरोप लगे हैं? आइए जानते हैं।

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को मंदिर में आने वाले नकद चढ़ावे और उसकी गिनती को लेकर कथित गड़बड़ियों की शिकायतें मिली थीं. इसके बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Chief Minister Yogi Adityanath) ने तीन सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया. SIT के प्रमुख और लखनऊ मंडल के आयुक्त विजय विश्वास पंत ने मंगलवार को रिपोर्ट शासन को सौंपी।


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    रिपोर्ट में आपराधिक कार्रवाई की सिफारिश की गई. इसके बाद अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि थाने में पहली एफआईआर दर्ज कर ली गई. एफआईआर में आरोप है कि मंदिर में आने वाले करोड़ों रुपये के चढ़ावे की सुरक्षा, परिवहन और काउंटिंग में कथित तौर पर हेराफेरी की गई।

    राम मंदिर में श्रद्धालु दानपात्रों में नकद चढ़ावा डालते हैं. इसके बाद पूरी प्रक्रिया कई चरणों में होती है. दानपात्रों की निगरानी, दानपात्रों को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाना, कैश की गिनती, रकम का रिकॉर्ड तैयार करना और बैंक में जमा कराना. जांच एजेंसियों का आरोप है कि इसी चेन के अलग-अलग फेज में कथित गड़बड़ी हुई।

    अब जानिए किस पर क्या आरोप है?
    रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू:
    अगर पूरे सिस्टम को देखें तो टिन्नू की जिम्मेदारी सबसे शुरुआती चरण की थी. एफआईआर के मुताबिक, वे मंदिर परिसर में रखे दानपात्रों की निगरानी करते थे और उन्हें बेसमेंट तक पहुंचाने का काम देखते थे. आरोप है कि इसी दौरान करोड़ों रुपये के चढ़ावे में कथित गबन किया गया और उससे अयोध्या व आसपास के जिलों में संपत्तियां बनाई गईं।

    लवकुश मिश्रा:
    लवकुश मिश्रा कैश काउंटिंग टीम का हिस्सा थे. उन पर आरोप है कि कैश काउंटिंग के दौरान रकम में कथित हेराफेरी की गई. जांच के दौरान उनके घर से करीब 12 लाख रुपये कैश मिलने का दावा किया गया है. जांच एजेंसियां अब इस रकम के सोर्स की भी जांच कर रही हैं.

    अनुकल्प मिश्रा:
    अनुकल्प मिश्रा भी कैश काउंटिंग रूम में काम करते थे. एफआईआर के अनुसार, उन पर आरोप है कि गिनती के दौरान कथित तौर पर रकम निकालकर बाद में उसका दुरुपयोग किया गया.

    सुभाष चंद्र श्रीवास्तव:
    ये कैश काउंटिंग स्टाफ के प्रभारी थे. मतलब गिनती की पूरी व्यवस्था पर निगरानी रखने की जिम्मेदारी इन्हीं की थी. एफआईआर में उन पर निगरानी में कथित लापरवाही और अनियमितताओं में संलिप्तता के आरोप हैं.

    करुणेश पांडेय:
    इनकी जिम्मेदारी दान की रकम को गिनती वाले कमरे तक पहुंचाने की थी. जांच एजेंसियों का आरोप है कि उन्होंने भी कथित हेराफेरी में भूमिका निभाई और उससे संपत्ति अर्जित की.

    मनीष कुमार यादव:
    मनीष यादव भी कैश काउंटिंग टीम में शामिल थे. एफआईआर के मुताबिक, जांच के दौरान उनके घर से करीब 36 लाख रुपये नकद मिलने का दावा किया गया है. अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह रकम कहां से आई.

    अविनाश शुक्ला:
    अविनाश शुक्ला भी दान की रकम को सुरक्षित तरीके से काउंटिंग रूम तक पहुंचाने और पूरी प्रक्रिया में शामिल थे. उन पर भी चढ़ावे की रकम के कथित दुरुपयोग और उससे संपत्ति बनाने का आरोप लगाया गया है.

    एफआईआर में सिर्फ आठ नाम ही नहीं हैं. कुछ अज्ञात लोगों को भी आरोपी बनाया गया है. यानी जांच के दौरान अगर किसी और की भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई हो सकती है।

    शिकायत किसने दर्ज कराई?
    इस पूरे मामले की शिकायत श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य कृष्ण मोहन ने दर्ज कराई है. कृष्ण मोहन इस समय श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य हैं. उन्हें 9 सितंबर 2025 को दिवंगत ट्रस्टी कामेश्वर चौपाल के निधन के बाद शामिल किया गया था. वे यूपी के हरदोई जिले के शाहाबाद क्षेत्र के रहने वाले हैं और भारतीय वन सेवा (IFS) के महाराष्ट्र कैडर के सीनियर अफसर रहे हैं. उन्होंने लखनऊ यूनिवर्सिटी से एमएससी की और साल 1978 में भारतीय वन सेवा में चुने गए. नागपुर में रहने के दौरान वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़े. संघ में नगर, जिला, प्रांत और क्षेत्रीय स्तर की जिम्मेदारियां संभालीं. इसके बाद साल 2012 में रिटायर होने के बाद वे समाजसेवा में सक्रिय हो गए।

    किन धाराओं में मामला दर्ज हुआ?
    एफआईआर में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की कई गंभीर धाराएं लगाई गई हैं. धारा 305 BNS – पूजा स्थल या सुरक्षित स्थान में चोरी, धारा 306 BNS- कर्मचारी या सेवक द्वारा चोरी, धारा 316(5) BNS – विश्वास में सौंपी गई संपत्ति का गंभीर दुरुपयोग, धारा 317(4) BNS- चोरी की संपत्ति का संरक्षण या कारोबार, धारा 317(5) BNS- चोरी की संपत्ति छिपाने में मदद करना, धारा 61 BNS- आपराधिक साजिश, धारा 3(5) BNS- सामूहिक अपराध में संयुक्त जिम्मेदारी और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13(1)(a) – पद और अधिकारों के दुरुपयोग से भ्रष्टाचार करने की धारा शामिल है।

    अब आगे क्या होगा?
    एफआईआर दर्ज होने के बाद अब पुलिस और SIT दोनों जांच आगे बढ़ा रही हैं. जांच एजेंसियां आरोपियों से पूछताछ कर रही हैं. उनकी चल-अचल संपत्तियों, बैंक खातों, नकदी और वित्तीय लेन-देन की भी जांच की जा रही है. अगर जांच में पर्याप्त साक्ष्य मिलते हैं तो चार्जशीट दाखिल होगी. इसके बाद अदालत तय करेगी कि किन आरोपों पर मुकदमा चलेगा और कौन दोषी हैं. फिलहाल इस पूरे मामले की जांच चल रही है।

    इस पूरे मामले को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि जांच पूरी तरह निष्पक्ष होगी और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा. सरकार का कहना है कि भगवान श्रीराम के मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा अर्पित दान और चढ़ावे की पवित्रता से किसी भी प्रकार का खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं होगा।

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