
भाजपा के सामने अपनों से पार पाना एक बड़ी चुनौती, कांग्रेस की ओर से प्रदेश अध्यक्ष ही नजर आ रहे चुनावी प्रचार में
इंदौर, संजीव मालवीय।
सत्ता के रहते दतिया (Datia) उपचुनाव (By-election) में जिस तरह का मुकाबला भाजपा (BJP) को करना पड़ रहा है, वह अब तक दूसरे उपचुनाव में नहीं देखा गया। शुरुआत में टिकट वितरण की नाराजगी अभी भी कार्यकर्ताओं के मन में है और भाजपा के सामने सबसे बड़ी चुनौती इसी से पार पाना है। ऊपर तो सबकुछ ठीक है, लेकिन अंदर ही अंदर जो चल रहा है, उसकी भनक भोपाल को भी है। मतदान में मात्र 5 दिन शेष बचे हैं, लेकिन न तो वहां भाजपा का माहौल बन रहा है और न ही कांगे्रस का। कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष अकेले ही यहां किला लड़ाने को मजबूर हैं तो बड़े नेताओं ने अभी यहां झांका तक नहीं है।
दिन-ब-दिन दतिया उपचुनाव रोचक होता जा रहा है। भाजपा ने यहां अपनी पूरी ताकत लगा दी है। यह उपचुनाव मुख्यमंत्री मोहन यादव तथा संगठन की नाक का सवाल बन गया है, जबकि दूसरी ओर कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी भी इसे अपनी प्रतिष्ठा का प्रश्न बनाए हुए हैं। दतिया में संगठन की दृष्टि से 6 मंडल हैं और इन 6 मंडलों में एक राज्य सरकार का मंत्री और एक संगठन का वरिष्ठ नेता तैनात कर रखा है। बाकी पदाधिकारियों को नीचे तैनात किया गया है, लेकिन स्थानीय कार्यकर्ताओं का सहयोग अभी भी भाजपा पदाधिकारियों को नहीं मिल पा रहा है। यही कारण है कि चुनाव का रुझान किस तरफ जाएगा इस बारे में कहा नहीं जा सकता। उपचुनाव का टिकट नरोत्तम मिश्रा से छीनकर आशुतोष तिवारी को देने की टीस अभी भी कार्यकर्ताओं के मन में है। भले ही वे ऊपरी तौर पर सबकुछ भूलने का दावा कर रहे हैं, लेकिन जो बाहरी नेता प्रचार में लगे हैं, उन्हें महसूस हो रहा है कि मिश्रा के कई क्षत्रप खुलकर सामने नहीं आ रहे हैं। कहा जाए कि नरोत्तम मिश्रा का जोर अभी भी दतिया में है तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी। इसी कारण यहां भाजपा को घाटा हो सकता है, क्योंकि मतदान के दिन तो उनका ही काम रहेगा कि लोगों को वोट डालने के लिए प्रेरित करें। 30 जुलाई को होने वाले मतदान में अभी मात्र 5 दिन शेष हैं। हालांकि आज मुख्यमंत्री दतिया पहुंच रहे हैं और उनके पहुंचने के बाद स्थानीय नेताओं के गिले-शिकवे भी दूर किए जाने की संभावना है, तभी चुनाव का प्रचार चरम पर नजर आएगा। दूसरी ओर जीतू पटवारी ही कांग्रेस से एक ऐसे अकेले नेता हैं, जो अपने प्रत्याशी घनश्याम के लिए जी-जान लगा रहे हैं और कांग्रेस को उम्मीद है कि भाजपा की अंदरूनी खींचतान का उन्हें फायदा मिल सकता है। पटवारी वहां से हटने को तैयार नहीं हैं।
पुराने पदाधिकारी अभी भी मानने को तैयार नहीं
सबसे बड़ी चुनौती पुराने पदाधिकारी हैं। अंदर की बात करें तो वे अभी भी नरोत्तम का टिकट काटने को लेकर गुस्से में हैं और बड़े नेताओं से भी नहीं माने हैं। कहा जा रहा है कि पार्टी लेवल पर उन्हें मनाने की कई बार कोशिश की गई है, लेकिन उनके हावभाव को देखकर नहीं लगता कि वे मान गए हैं। आज मुख्यमंत्री के दौरे के बाद कुछ हालात पलटने के आसार हैं।
कांग्रेस के बड़े नेताओं ने झांका तक नहीं
कांग्रेस में दिग्विजयसिंह, कमलनाथ और राहुलसिंह जैसे बड़े नेता अभी भी हैं, लेकिन किसी ने अभी वहां झांका तक नहीं है। कांग्रेस के पास चुनाव लडऩे का कोई बड़ा प्लान नहीं है और यही कारण कांग्रेस को भी पीछे धकेल रहा है। हालांकि कांग्रेस की सेकंड लाइन के नेताओं को जरूर चुनाव प्रचार में लगा रखा है, जिसकी पटवारी मॉनीटरिंग कर रहे हैं, लेकिन बाहरी नेता परिणाम को अपने पक्ष में ला पाएंगे या नहीं, यह तो मतगणना वाले दिन ही पता चल पाएगा।
इंदौरी नेता को दी एक मंडल की जवाबदारी
इंदौर से भाजपा के वरिष्ठ नेता जीतू जिराती और महामंत्री गौरव रणदिवे को दतिया में चुनावी जवाबदारी दी गई है। हालांकि गौरव अभी तक निजी कारणों के चलते चुनाव प्रचार में सक्रिय नहीं हुए हैं। उन्होंने इसकी जानकारी पहले ही संगठन को दे दी। जिराती को शहरी मंडल दिया गया है, जहां उनके साथ मंत्री उदयप्रतापसिंह हैं। यहां हर जाति और धर्म के वोटों का बाहुल्य है, जिनमें सामंजस्य बिठाकर भाजपा के पक्ष में माहौल बनाना है। शक्ति केन्द्रों पर भी प्रदेश के नेताओं को तैनात किया गया है। एक शक्ति केन्द्र में अधिक से अधिक 3 वार्ड रखे गए हैं। भाजपा की बूथ व्यूहरचना भी यहां कारगर साबित हो रही है, लेकिन स्थानीय कार्यकर्ताओं के बिना यह असंभव ही है।
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