
इंदौर। गो सम्मान आह्वान अभियान को लेकर दिल्ली में एक बैठक राष्ट्रव्यापी गौ सेवा अभियान की रूपरेखा तय की गई है, जिसमें सभी ने एक मत से निर्णय लेते हुए गौमाता को सम्मान दिलाने के लिए 27 अप्रैल को गो सम्मान दिवस मनाया जाएगा। बैठक में पहुंचे देशभर के संतों, गोभक्तों और गोसेवकों ने सर्वसम्मति से निर्णय लिया कि यह अभियान किसी संस्था, संगठन या राजनीतिक दल के बैनर तले नहीं, बल्कि गौमाता और नंदी बाबा के सानिध्य में संचालित होगा। यह बात आज इंदौर प्रेस क्लब में आयोजित पत्रकार वार्ता में कृष्णायन गोशाला हरिद्वार के अच्युतानंद जी महाराज, गोपालाचार्य गोपालानंद सरस्वती महाराज ने पत्रकारों से चर्चा करते हुए कही।
उन्होंने कहा कि बैठक में उपस्थित संतों और गोसेवकों ने एक स्वर में कहा कि इस अभियान का मुख्य उद्देश्य भारत में गो संरक्षण एवं संवर्धन हेतु एक केन्द्रीय कानून बनाना, गौमाता को राष्ट्रमाता का दर्जा दिलाना, गौहत्या पर पूर्ण प्रतिबंध लागू करवाना और गोवर्धन संस्कृति के संरक्षण के लिए ठोस सरकारी नीतियां बनवाना जैसे मुद्दे शामिल हैं।
संतों ने सरकार से आग्रह किया कि गौ रक्षा के लिए केन्द्रीय कानून बनाया जाए, गोहत्या और गोतस्करी में लिप्त अपराधियों को आजीवन कारावास का प्रावधान कर जब्त किए गए वाहनों को गोशालाओं के उपयोग में लाया जाए। इसके साथ ही गोबर और गोमूत्र पर आधारित अनुसंधान के लिए विश्वविद्यालय स्थापित किए जाएं। पंचगव्य औषधियों का आयुर्वेदिक चिकित्सालयों में नि:शुल्क वितरण किया जाए तथा सरकारी भवनों में गोबर पेंट और गौनाइल का उपयोग अनिवार्य किया जाए। गौशालाओं को मनरेगा से जोड़ा जाए, बिजली बिल में छूट मिले और निराश्रित गौवंश की सेवा के लिए चारे की उचित व्यवस्था हो।
अभियान में जनवरी से मार्च 2026 तक पूरे देश में प्रचार-प्रसार अभियान चलाया गया। इसके बाद 27 अप्रैल को देश के सभी 5410 तहसील/तालुकाओं मुख्यालय पर राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, राज्यपाल और मुख्यमंत्री के नाम प्रार्थना पत्र सौंपे जाएंगे। प्रत्येक तहसील से 11000 हस्ताक्षर युक्त प्रार्थना पत्र एवं देश में कुल पांच करोड़ पिंचान्वे लाख दस हजार हस्ताक्षर युक्त प्रार्थना पत्र के साथ दिया जाएगा। सरकार द्वारा अपेक्षित जवाब नहीं मिलने पर जुलाई और अक्टूबर 2026 में पुन: यह प्रक्रिया दोहराई जाएगी। इसके बाद 27 फरवरी 2027 को देश के 800 जिलों और 5000 तहसीलों से आए संत और गोभक्त दिल्ली में एकत्र होकर शांतिपूर्ण संकीर्तन के माध्यम से गौ सेवा, गौ सुरक्षा और गौ सम्मान के लिए केन्द्र सरकार से आह्वान करेंगे। यह संकीर्तन 6 माह 15 अगस्त 2027 तक चलेगा। संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर संत गंगाजल पान करके उपवास करेंगे और अन्त में देश के सन्त गोमाता हितार्थ आमरण अनशन करेंगे। अभियान पूरी तरह अहिंसक और गैर राजनीतिक होगा। केवल संकीर्तन, प्रार्थना और जनजागरण के माध्यम से संदेश दिया जाएगा। अभियान का प्रतीक केवल नंदी महाराज और गौमाता का चित्र होगा।
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