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गूगल के को-फाउंडर ने गुस्से में लिया अजीब फैसला, दान कर दिए इतने करोड़ रुपये

May 23, 2026

नई दिल्ली: Google के को-फाउंडर Sergey Brin ने अमेरिका (America) में चल रही टैक्स बहस के बीच बड़ा और चौंकाने वाला कदम उठाया है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, ब्रिन ने सैन फ्रांसिस्को में प्रस्तावित एक नए व्यापारिक टैक्स कानून के विरोध में करीब 5 लाख डॉलर यानी लगभग 4.77 करोड़ रुपये का दान दिया है. यह पैसा उस राजनीतिक समिति को दिया गया है जो Overpaid CEO Tax नाम के प्रस्ताव का विरोध कर रही है. इस टैक्स प्रस्ताव को लेकर सैन फ्रांसिस्को में बड़ी राजनीतिक लड़ाई चल रही है.

आने वाले 2 जून को वहां के मतदाता दो अलग-अलग टैक्स प्रस्तावों Measure C और Measure D पर वोट डालने वाले हैं. Measure C को व्यापारिक संगठनों और बिजनेस ग्रुप्स का समर्थन मिल रहा है. इसके तहत छोटे कारोबारियों को टैक्स में राहत देने की बात कही गई है. इस प्रस्ताव में छोटे व्यवसायों के लिए टैक्स छूट की सीमा 50 लाख डॉलर से बढ़ाकर 75 लाख डॉलर करने का सुझाव दिया गया है. इसके बदले बड़ी कंपनियों पर टैक्स का बोझ बढ़ेगा.


  • वहीं, दूसरी तरफ Measure D काफी विवादों में है. इसे Overpaid CEO Tax कहा जा रहा है. इस प्रस्ताव में कंपनियों के CEO और कर्मचारियों की सैलरी के अंतर के आधार पर टैक्स तय करने की बात है. खास बात यह है कि इसमें केवल सैन फ्रांसिस्को ही नहीं बल्कि कंपनी के ग्लोबल कर्मचारियों की सैलरी को भी शामिल किया जाएगा. श्रम संगठनों और प्रगतिशील समूहों का कहना है कि बड़ी और अमीर कंपनियों को ज्यादा टैक्स देना चाहिए ताकि शहर की आर्थिक स्थिति मजबूत हो सके. लेकिन बिजनेस समूहों का दावा है कि इससे कंपनियां सैन फ्रांसिस्को छोड़ सकती हैं और नौकरियों पर असर पड़ेगा.

    Sergey Brin चल रहे हैं नाराज
    Sergey Brin भी इसी बात को लेकर नाराज बताए जा रहे हैं. रिपोर्ट्स के अनुसार, उन्होंने सिर्फ विरोध करने के लिए ही नहीं बल्कि एक वैकल्पिक बिजनेस-फ्रेंडली प्रस्ताव को भी आर्थिक मदद दी है. ब्रिन की कुल संपत्ति करीब 260 अरब डॉलर आंकी जाती है. कुछ समय पहले उन्होंने अपना निवास California से हटाकर Nevada में Lake Tahoe के पास बना लिया था. माना जाता है कि Nevada में राज्य टैक्स नहीं होने की वजह से यह फैसला आर्थिक रूप से फायदेमंद है.

    समाजवाद के खिलाफ हैं ब्रिन
    ब्रिन ने हाल ही में एक सार्वजनिक बयान में कहा था कि वह समाजवाद के खिलाफ हैं. उन्होंने कहा कि उनका परिवार 1979 में सोवियत संघ से भागकर अमेरिका आया था और उन्होंने समाजवाद के नुकसान करीब से देखे हैं. ब्रिन के मुताबिक, वह नहीं चाहते कि California उसी रास्ते पर जाए.

    अब इस पूरे मामले ने अमेरिका के टेक सेक्टर में नई बहस छेड़ दी है. कई लोग मानते हैं कि सिलिकॉन वैली के अरबपति अब राजनीति में खुलकर दखल दे रहे हैं, खासकर तब जब नई नीतियां उनके कारोबार और संपत्ति को प्रभावित करती हैं. सैन फ्रांसिस्को पहले से ही खाली ऑफिस, कंपनियों के पलायन और आर्थिक चुनौतियों से जूझ रहा है. ऐसे में आने वाला यह वोट सिर्फ स्थानीय राजनीति नहीं बल्कि पूरे अमेरिकी टेक उद्योग के लिए बेहद अहम माना जा रहा है.

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