
नई दिल्ली । उत्तराखंड (Uttarakhand) में सरकारी अस्पतालों (Government Hospitals) के डॉक्टरों को शाम के समय मरीज देखने के लिए सशर्त निजी प्रैक्टिस (Private Practice) की अनुमति देने की तैयारी की जा रही है। सरकार का उद्देश्य डॉक्टरों (Doctors) की सेवाओं का बेहतर इस्तेमाल करने के साथ मरीजों को सरकारी अस्पतालों में कम खर्च पर इलाज की सुविधा उपलब्ध कराना है। प्रस्तावित व्यवस्था (Proposed System) में डॉक्टर अस्पताल परिसर (Hospital Premises) के बाहर निजी क्लीनिक (Private Clinics) नहीं चला सकेंगे।
राज्य में फिलहाल सरकारी डॉक्टरों के निजी प्रैक्टिस करने पर रोक है। इसके बदले उन्हें नियमित वेतन के अलावा नॉन प्रैक्टिस अलाउंस दिया जाता है। इसके बावजूद कई डॉक्टरों के निजी स्तर पर मरीज देखने की बात सामने आती रही है। सरकार अब इस व्यवस्था को नियंत्रित तरीके से सरकारी अस्पतालों के भीतर लाने पर विचार कर रही है।
प्रस्ताव के अनुसार सरकारी डॉक्टर शाम के समय अपने ही सरकारी अस्पताल परिसर में मरीजों को देख सकेंगे। यह व्यवस्था पूरी तरह ऐच्छिक होगी। डॉक्टरों के लिए इसे अनिवार्य नहीं बनाया जाएगा। इसके साथ ही मरीजों से ली जाने वाली फीस भी न्यूनतम रखने का प्रावधान प्रस्तावित है, ताकि आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों को इसका लाभ मिल सके।
नई व्यवस्था में डॉक्टरों के लिए सबसे महत्वपूर्ण शर्त यह होगी कि वे मरीजों को अस्पताल परिसर के बाहर नहीं देख सकेंगे। इसका मतलब है कि निजी प्रैक्टिस के नाम पर अलग क्लीनिक चलाने या किसी अन्य निजी स्थान पर मरीज देखने की अनुमति नहीं होगी। इससे सरकारी अस्पतालों में उपलब्ध संसाधनों और चिकित्सा सुविधाओं का इस्तेमाल भी बढ़ाया जा सकेगा।
दूसरी अहम शर्त इलाज से जुड़ी होगी। यदि किसी मरीज को ऑपरेशन या अन्य ऐसी चिकित्सा प्रक्रिया की जरूरत पड़ती है, तो उसे सरकारी अस्पताल में ही किया जाएगा। डॉक्टर मरीज को ऑपरेशन के लिए निजी अस्पताल या अपने निजी क्लीनिक में भेजकर वहां उपचार नहीं कर सकेंगे। इससे मरीजों को सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था के भीतर ही आगे का इलाज मिल सकेगा।
तीसरी प्रमुख शर्त दवाओं से संबंधित है। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत डॉक्टर मरीजों को बाहर से दवाएं खरीदने के लिए नहीं लिख सकेंगे। कोशिश यह रहेगी कि मरीजों को सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था में उपलब्ध सुविधाओं और दवाओं का अधिकतम लाभ मिले। इससे इलाज का अतिरिक्त खर्च कम करने में मदद मिल सकती है।
स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल की अध्यक्षता में हुई बैठक में इस व्यवस्था पर चर्चा की गई है। सरकार की ओर से संकेत दिया गया है कि प्रस्ताव को जल्द मंत्रिमंडल के सामने रखा जा सकता है। अंतिम निर्णय कैबिनेट की मंजूरी और नियमों के स्पष्ट होने के बाद ही लागू होगा।
सरकार का मानना है कि इस व्यवस्था से खासकर पर्वतीय क्षेत्रों के मरीजों को फायदा हो सकता है। कई स्थानों पर सरकारी अस्पतालों में नियमित सेवाएं दोपहर बाद सीमित हो जाती हैं। ऐसे में शाम के समय मरीजों को इलाज के लिए निजी अस्पतालों या दूर के स्वास्थ्य केंद्रों का रुख करना पड़ता है।
शाम के समय सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों की उपलब्धता बढ़ने से मरीजों को उसी परिसर में कम खर्च पर चिकित्सा सलाह मिल सकेगी। साथ ही सरकारी अस्पतालों की इमारत, उपकरण और अन्य सुविधाओं का उपयोग अधिक समय तक किया जा सकेगा। हालांकि व्यवस्था लागू होने से पहले फीस, समय, रिकॉर्ड रखने, दवा उपलब्धता और डॉक्टरों की जिम्मेदारियों से जुड़े नियम स्पष्ट करना जरूरी होगा।
यदि प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है तो उत्तराखंड में सरकारी डॉक्टरों की निजी प्रैक्टिस को नियंत्रित और संस्थागत रूप देने की दिशा में यह बड़ा बदलाव होगा। सरकार की चुनौती यह सुनिश्चित करना होगी कि इस सुविधा का लाभ मरीजों को मिले और सरकारी अस्पतालों की नियमित सेवाओं पर इसका नकारात्मक असर न पड़े।
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