लखनऊ। देश में पेट्रोल-डीजल (Petrol-Diesel) की सप्लाई सामान्य होने के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और कहानी बयां कर रही है। उत्तर प्रदेश के कुशीनगर और आसपास (Kushinagar and surroundings) के इलाकों में कई पेट्रोल पंप या तो पूरी तरह सूखे पड़े मिले या फिर सीमित मात्रा में ही तेल दिया जा रहा था। कहीं बाइक में सिर्फ 100 रुपये का पेट्रोल मिल रहा था तो कहीं कार और ट्रैक्टर के लिए डीजल की सीमा तय कर दी गई थी।
कुशीनगर की ग्राउंड रिपोर्टिंग के दौरान ऑयल मार्केटिंग कंपनियों के दावों और वास्तविक स्थिति के बीच बड़ा अंतर देखने को मिला।
बुधवार दोपहर करीब दो बजे मथौली नगर पंचायत से कुशीनगर की ओर यात्रा शुरू हुई। कस्बे से बाहर निकलते ही Indian Oil Corporation के एक पेट्रोल पंप पर सन्नाटा पसरा मिला। आगे रस्सी बांधकर बैरिकेडिंग की गई थी। पूछने पर पता चला कि पंप पर पेट्रोल-डीजल खत्म हो चुका है।
करीब एक किलोमीटर आगे Hindustan Petroleum के पंप पर तेल तो उपलब्ध था, लेकिन वहां वाहनों की लंबी कतार लगी हुई थी।
नेशनल हाईवे 27 पर आगे बढ़ने के दौरान कई पंपों की स्थिति चिंताजनक दिखाई दी। हाटा के पास एक पेट्रोल पंप पर बाइक में 200 रुपये का पेट्रोल भरवाने की कोशिश की गई, लेकिन कर्मचारी ने साफ कह दिया कि केवल 100 रुपये का ही पेट्रोल मिलेगा।
जब डीजल की सीमा पूछी गई तो जवाब मिला कि अधिकतम 1000 रुपये तक ही डीजल दिया जा रहा है। कर्मचारियों ने बताया कि यह फैसला पंप मालिकों की ओर से लिया गया है।
स्थिति इतनी सख्त थी कि एक ग्राहक को 105 रुपये का पेट्रोल देने से भी इनकार कर दिया गया।
कुशीनगर पहुंचने के बाद और वापसी के दौरान कई पेट्रोल पंप पूरी तरह बंद मिले। कुछ जगहों पर रस्सी लगाकर ग्राहकों को रोका जा रहा था। एक निजी कंपनी के पंप पर न पेट्रोल उपलब्ध था और न ही डीजल।
Bharat Petroleum के एक पंप पर सिर्फ डीजल मिल रहा था, वह भी अधिकतम 1000 रुपये तक। यहां किसानों की लंबी कतारें लगी थीं। कई लोग ट्रैक्टर और गैलन लेकर अपनी बारी का इंतजार कर रहे थे।
ग्रामीण इलाकों में स्थिति ज्यादा गंभीर दिखाई दी। खेतों और मशीनों के लिए डीजल की जरूरत बढ़ने के कारण किसान बड़ी संख्या में गैलन लेकर पेट्रोल पंपों पर पहुंचे हुए थे। कई पंप कर्मचारियों ने बताया कि पेट्रोल सुबह से ही खत्म हो चुका था।
हालांकि तेल कंपनियां लगातार सप्लाई सामान्य होने का दावा कर रही हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर कई जिलों में सीमित बिक्री, लंबी कतारें और ड्राई पंप लोगों की चिंता बढ़ा रहे हैं। खासकर ग्रामीण और हाईवे इलाकों में लोगों को पेट्रोल-डीजल के लिए घंटों इंतजार करना पड़ रहा है।
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