नई दिल्ली। राज्यसभा चुनाव (Election Commission of India) ने राज्यसभा की 24 सीटों और दो उपचुनावों के लिए 18 जून को मतदान कराने की घोषणा कर दी है। इन चुनावों के बाद उच्च सदन के राजनीतिक समीकरणों में बहुत बड़ा बदलाव तो नहीं दिख रहा, लेकिन भाजपा और कांग्रेस दोनों की संख्या में मामूली फेरबदल संभव माना जा रहा है।
इस चुनाव में आंध्र प्रदेश, गुजरात और कर्नाटक की चार-चार सीटों, मध्य प्रदेश और राजस्थान की तीन-तीन सीटों, झारखंड की दो सीटों तथा मणिपुर, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश और मिजोरम की एक-एक सीट पर मतदान होगा। इसके अलावा महाराष्ट्र और तमिलनाडु में एक-एक सीट पर उपचुनाव भी कराए जाएंगे।
26 सीटों में से राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन यानी National Democratic Alliance के पास फिलहाल 18 सीटें हैं। इनमें अकेले भाजपा की 12 सीटें शामिल हैं। वहीं कांग्रेस की चार सीटें, YSR कांग्रेस की तीन और झारखंड मुक्ति मोर्चा की एक सीट खाली हो रही है।
भाजपा की जिन सीटों पर कार्यकाल समाप्त हो रहा है, उनमें गुजरात से तीन, कर्नाटक, मध्य प्रदेश और राजस्थान से दो-दो तथा अरुणाचल प्रदेश, झारखंड और मणिपुर से एक-एक सीट शामिल है।
राज्य विधानसभाओं में मौजूदा संख्या बल के आधार पर भाजपा इस बार 12 में से लगभग 11 सीटें ही सुरक्षित कर पाएगी। ऐसे में उसकी राज्यसभा संख्या में एक सीट की कमी आ सकती है।
वर्तमान में राज्यसभा में भाजपा के 113 सदस्य हैं, जबकि एनडीए का कुल आंकड़ा 147 है। अगर अनुमान सही साबित हुए तो भाजपा की संख्या 112 तक पहुंच सकती है।
वहीं कांग्रेस को इस चुनाव में फायदा होता दिखाई दे रहा है। कर्नाटक में उसके पास तीन सीटें जीतने का मजबूत गणित है। इसके अलावा मध्य प्रदेश और राजस्थान में भी वह एक-एक सीट हासिल कर सकती है।
झारखंड में झारखंड मुक्ति मोर्चा, कांग्रेस और सहयोगी दलों के पास मिलाकर 56 विधायक हैं। ऐसे में गठबंधन दोनों सीटें जीत सकता है। राजनीतिक चर्चाओं के मुताबिक कांग्रेस झामुमो से एक सीट की मांग कर सकती है।
यदि कांग्रेस को झारखंड से अतिरिक्त सीट मिल जाती है, तो उसके कुल छह उम्मीदवार राज्यसभा पहुंच सकते हैं। फिलहाल उसके 29 सदस्य हैं और चार सदस्य सेवानिवृत्त हो रहे हैं। ऐसे में चुनाव के बाद उसकी संख्या 30 से बढ़कर 31 तक पहुंच सकती है।
इन चुनावों में सबसे ज्यादा असर क्षेत्रीय दलों के समीकरणों पर पड़ने की संभावना है। खासकर दक्षिण भारत और झारखंड की राजनीति में गठबंधन की मजबूती और सीट बंटवारे को लेकर नई रणनीतियां बन सकती हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राज्यसभा में एनडीए अभी भी मजबूत स्थिति में रहेगा, लेकिन कांग्रेस की संख्या में संभावित बढ़ोतरी विपक्ष को मनोवैज्ञानिक बढ़त दे सकती है।
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