
देश का नम्बर वन हिंदी सांध्य दैनिक होने का गौरव हासिल करने वाला हम सभी का लोकप्रिय अग्निबाण आज अपने सफलतम 50वें वर्ष में प्रवेश कर रहा है। निडर, स्पष्टवादिता और तथ्यपरक खोजी एवं सच्ची खबरें अपने पाठकों को देने वाले अखबार के रूप में अग्निबाण ने अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है। इसका हिस्सा होने पर मुझे केवल गर्व ही नहीं बल्कि नाज भी है, क्योंकि पत्रकारिता के करीब 42 साल के लंबे जीवनकाल में मैने जो भी मुकाम हासिल किया है, उसका संपूर्ण श्रेय अग्निबाण और इसके प्राण पुरुष मेरे पितातुल्य स्व, नरेशचंद्रजी चेलावत को ही जाता है। परिवार की आर्थिक स्थिति बेहतर ना होने के चलते सन 82-83 में माध्यमिक शिक्षाकाल में पढ़ाई के खर्च उठाने के लिए मैं अग्निबाण में हॉकर के रूप में कार्य करता था। पता नहीं आदरणीय नरेशचंद्रजी ने मुझमें क्या देखा कि मुझे दिन में आफिस बुलाकर अखबार से संबंधित छुटपुट काम करवाने लगे।
धीरे-धीरे मुझे पत्रकारिता से जोडऩा शुरू किया और यह सफर अनवरत आज भी जारी है। आज वटवृक्ष का रूप लेकर सफलता का अद्र्धशतक लगा रहे अग्निबाण की इस विजय के पीछे अदम्य संघर्ष और साहस की लंबी कहानी है। शुरुआती दिनों में अखबार की प्रिंटिंग के लिए कागज से लेकर अन्य संसाधन/खर्च की व्यवस्था जुटाना भी टेढ़ी खीर था… इससे भी अधिक भागीरथी प्रयास अखबार की प्रसार संख्या बढ़ाने एवं विज्ञापन जुटाने में करना पड़ते थे, लेकिन कर्मयोद्धा आदरणीय बाबूजी ने कभी हार नहीं मानी। उनके साथ कदमताल करते हुए उसी शिद्दत, परिश्रम एवं लगन से दादा राजेशजी चेलावत ने भी इस पौधे को अनवरत सींचा….इसी बीच जब अग्निबाण ने सफलता की रफ्तार पकड़ी, दुर्भाग्य से बाबूजी हम सभी को छोड़ कर चले गए..उनके बाद राजेशजी ने जी तोड़ मेहनत और अपनी संकल्प शक्ति के दम पर आदरणीय बाबूजी के आशीर्वाद से उनके अधूरे सपने को साकार करते हुए अग्निबाण को उस ऊंचाइयों पर पहुंचाया, जिसे देख आदरणीय बाबूजी का मन स्वर्ग में भी गौरवान्वित महसूस कर फूला नहीं समाता होगा… कई दशक गुजर गए, लेकिन आज अग्निबाण के प्रति प्रतिबद्धता/कर्मठता सर्वोपरि है… इसी का परिणाम है कि आज अग्निबाण देश के नम्बर वन सांध्य दैनिक के रूप में दमक रहा है…
-तेज कुमार सेन
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