नई दिल्ली। देश के बड़े शहरों की व्यवस्था में बड़ा बदलाव संभव है, अगर महापौरों (mayor) को ज्यादा अधिकार दिए जाएं। नीति आयोग (Policy commission) की नई रिपोर्ट में कहा गया है कि 10 लाख से अधिक आबादी वाले 46 शहरों में मजबूत मेयर सिस्टम (mayor system) लागू होने से शहरी सेवाओं की गुणवत्ता में बड़ा सुधार आ सकता है।
क्यों जरूरी है मजबूत मेयर सिस्टम?
रिपोर्ट के मुताबिक, जल आपूर्ति, स्वच्छता, कचरा प्रबंधन, शहरी नियोजन, अग्निशमन सेवाएं और बस संचालन जैसी बुनियादी सेवाएं तभी बेहतर होंगी, जब शहर स्तर पर निर्णय लेने की ताकत बढ़ेगी।
मुख्य सिफारिशें क्या हैं?
नीति आयोग ने सुझाव दिया है कि:
राज्यों में असमानता का मुद्दा
रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि अलग-अलग राज्यों में शहरों के अधिकारों में काफी अंतर है। महाराष्ट्र और गुजरात जैसे राज्यों में नगर निकायों को अधिक शक्तियां मिली हैं, जबकि दिल्ली, कर्नाटक, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश समेत कई राज्यों में बस सेवाएं और शहरी नियोजन जैसे अहम काम अब भी राज्य सरकारों के नियंत्रण में हैं।
कैसे बदलेगी तस्वीर?
रिपोर्ट के अनुसार, अगर मेयर-इन-काउंसिल प्रणाली लागू होती है, तो शहरों में विभागवार जिम्मेदारी तय होगी। हर पार्षद को एक विशेष विभाग सौंपा जाएगा और मेयर को अधिकारियों की नियुक्ति का अधिकार मिलेगा। इससे फैसले तेजी से होंगे और जवाबदेही भी बढ़ेगी।
गौरतलब है कि देश के ये 46 बड़े शहर करीब 10,926 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैले हैं और शहरी आबादी का लगभग 36% हिस्सा इन्हीं में रहता है। ऐसे में नीति आयोग का मानना है कि शहरों को सशक्त बनाना ही भारत के शहरी विकास की कुंजी है।
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