नई दिल्ली। दुनिया भर में आर्थिक अनिश्चितता (Economic uncertainty) और पश्चिम एशिया संकट के बीच भारत को सबसे मजबूत उभरती अर्थव्यवस्थाओं (Economies) में गिना जा रहा है। विश्व आर्थिक मंच (World Economic Forum) (डब्ल्यूईएफ) की ताजा रिपोर्ट में दावा किया गया है कि वैश्विक आर्थिक सुस्ती के बावजूद भारत की विकास दर 2026-27 में करीब 6.5 फीसदी रह सकती है।
रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया के अधिकांश प्रमुख अर्थशास्त्रियों को अगले एक साल में वैश्विक आर्थिक विकास की रफ्तार धीमी पड़ने की आशंका है। हालांकि भारत को ऐसा देश माना जा रहा है, जहां मजबूत घरेलू मांग, निवेश और बुनियादी ढांचे पर लगातार खर्च अर्थव्यवस्था को सहारा दे सकता है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि Strait of Hormuz के बंद होने की आशंका वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए गंभीर संकट पैदा कर सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह स्थिति पिछले साल के वैश्विक टैरिफ विवादों से भी ज्यादा खतरनाक साबित हो सकती है।
सर्वे में शामिल 94 प्रतिशत अर्थशास्त्रियों ने माना कि यदि होर्मुज जलडमरूमध्य लंबे समय तक बंद रहता है तो ऊर्जा और खाद्य पदार्थों की कीमतों में भारी बढ़ोतरी हो सकती है। साथ ही वैश्विक सप्लाई चेन भी बुरी तरह प्रभावित हो सकती है।
रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि यदि यह संकट साल के अंत तक जारी रहता है, तो इसका असर कोविड-19 महामारी जैसी आर्थिक चुनौतियों के करीब पहुंच सकता है। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण तेल आपूर्ति, व्यापार मार्गों और वैश्विक बाजारों पर दबाव बढ़ने की आशंका जताई गई है।
World Economic Forum ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि भारत ने व्यापार नीतियों को अधिक खुला बनाने, बुनियादी ढांचे को मजबूत करने, तकनीकी निवेश बढ़ाने और घरेलू उत्पादन क्षमता को प्रोत्साहित करने के लिए कई अहम कदम उठाए हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, उभरती अर्थव्यवस्थाओं में भारत आकार, विकास और दीर्घकालिक संभावनाओं का सबसे संतुलित मिश्रण पेश कर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि घरेलू मांग और निवेश के दम पर भारत वैश्विक संकट के बीच भी अपेक्षाकृत मजबूत बना रह सकता है।
सर्वेक्षण में शामिल करीब 90 प्रतिशत अर्थशास्त्रियों ने अगले एक साल में वैश्विक आर्थिक वृद्धि धीमी होने की संभावना जताई है। हालांकि, केवल 13 प्रतिशत विशेषज्ञों ने वैश्विक मंदी की आशंका व्यक्त की।
रिपोर्ट के मुताबिक, पश्चिम एशिया संकट का सबसे अधिक असर मध्य पूर्व और उत्तरी अफ्रीका क्षेत्र पर पड़ सकता है। इसके विपरीत भारत और United States जैसी बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के घरेलू बाजार उन्हें अपेक्षाकृत स्थिर बनाए रखने में मदद कर सकते हैं।
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