
वॉशिंगटन। अमेरिका (America) के लॉस एंजिल्स (Los Angeles) में मेयर पद (Mayoral Post) के लिए 2 जून को होने वाले चुनाव में भारतीय मूल की नित्या रमन (Nitya Raman) एक अहम उम्मीदवार के तौर पर उभर रही हैं। मौजूदा मेयर कैरेन बास के बीच मुकाबले में नित्या की लोकप्रियता तेजी से बढ़ती दिखाई दे रही है। इसी वजह से उनकी तुलना जोहरान ममदानी से की जा रही है, जिन्होंने हाल ही में न्यूयॉर्क में मेयर पद का चुनाव जीतकर सुर्खियां बटोरी थीं।
30 अप्रैल तक के पॉलीमार्केट सर्वे के मुताबिक, नित्या रमन के चुनाव में आगे रहने की संभावना करीब 60 फीसदी बताई गई है। दिलचस्प बात यह है कि उन्होंने फरवरी में देर से चुनावी मैदान में एंट्री की, लेकिन कुछ ही महीनों में वह प्रमुख दावेदारों में शामिल हो गईं।
कौन हैं नित्या रमन?
नित्या रमन का जन्म 28 जुलाई 1981 को केरल के तमिल परिवार में हुआ था। बचपन के शुरुआती साल भारत में बिताने के बाद उनका परिवार अमेरिका चला गया और लुइसियाना में बस गया। 22 साल की उम्र में उन्होंने अमेरिकी नागरिकता प्राप्त की।
उन्होंने मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से अर्बन प्लानिंग में मास्टर डिग्री हासिल की और हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में पॉलिटिकल थ्योरी की पढ़ाई की। नित्या ने शहरी नीतियों और सामाजिक कार्यों के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाई है।
वर्तमान में वह लॉस एंजिल्स के डिस्ट्रिक्ट-4 से सिटी काउंसिल सदस्य हैं और 2020 से इस पद पर कार्यरत हैं। राजनीति में आने से पहले उन्होंने ‘सेलाह नेबरहुड होमलेस कोएलिशन’ की सह-स्थापना की थी और बेघर लोगों से जुड़े मुद्दों पर सक्रिय रूप से काम किया। खास बात यह रही कि उन्होंने मेयर चुनाव के लिए अंतिम समय में नामांकन दाखिल किया, जिससे राजनीतिक हलकों में हलचल मच गई। इससे पहले वह कैरेन बास का समर्थन कर रही थीं।
ममदानी से क्यों हो रही तुलना?
जोहरान ममदानी और नित्या रमन के बीच तुलना की कई वजहें हैं। दोनों ही भारतीय मूल से जुड़े हैं और प्रोग्रेसिव राजनीति के उभरते चेहरे माने जाते हैं। दोनों नेताओं के मुद्दों में भी समानता है, जैसे- हाउसिंग, किराया नियंत्रण और सामाजिक न्याय। जहां नित्या रमन लॉस एंजिल्स में बेघर लोगों और किरायेदारों के अधिकारों के लिए काम कर रही हैं, वहीं ममदानी न्यूयॉर्क में मजदूरों, प्रवासियों और पब्लिक सर्विसेज से जुड़े मुद्दों को मजबूती से उठाते रहे हैं। इस वजह से नित्या रमन को अमेरिका की राजनीति में एक नए उभरते प्रोग्रेसिव चेहरे के रूप में देखा जा रहा है, जिन पर आने वाले चुनाव में सभी की नजरें टिकी हैं।
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