
इंदौर, राजेश ज्वेल
शहर (Indore) का पुराना और लोकप्रिय सपना-संगीता सिनेमा (Sapna-Sangeeta Cinema) जिस जमीन पर निर्मित है वह इंदौर विकास प्राधिकरण (IDA) की योजना 47 में शामिल रही और भूखंड क्रमांक 40 की इस 40 हजार स्क्वेयर फीट जमीन को 15.12.1980 को सुरेशचंद्र खंडेलवाल तर्फे पार्टनर संजय तोलानी को आवंटित की गई थी। सिनेमा उपयोग के लिए दी गई इस जमीन पर दो थिएटर सपना और संगीता निर्मित किए गए और कुछ वर्ष बाद सिनेमा के साथ-साथ कुछ व्यावसायिक गतिविधियों, खासकर गाड़ी के शोरूम भी खोल लिए, जिसके चलते प्राधिकरण ने लीज शर्तों के उल्लंघन के मामले में कार्रवाई की। मगर बाद में अदालती आदेश के चलते लीज बहाल करना पड़ी और शासन की मल्टीप्लेक्स पॉलिसी के तहत नगर तथा ग्राम निवेश ने भी अभिन्यास मंजूर किया। प्राधिकरण ने जब लीज की बहाली की, तब कम्पाउंडिंग फीस और साथ में जीएसटी की राशि जोड़ते हुए 1 करोड़ 12 लाख रुपए अतिरिक्त जमा करा लिए। कुछ समय बाद जब सिनेमा संचालकों यह समझ आया कि यह राशि अवैध वसूल कर ली गई, तब उन्होंने प्राधिकरण से यह राशि मांगी और ना मिलने पर हाईकोर्ट में याचिका दायर की, जहां से ब्याज सहित राशि लौटाने के आदेश हुए और उसके बाद भी राशि ना देने पर सीईओ के खिलाफ अवमानना याचिका दायर की गई, जिस पर अभी एक दिन पहले हाईकोर्ट में माफी मांगते हुए ब्याज सहित राशि का चैक सिनेमा संचालक को सौंप दिया।
प्राधिकरण ने कम्पाउंडिंग फीस के रूप में 87 लाख 94 हजार 118 रुपए तथा उस पर 18 फीसदी जीएसटी की राशि आरोपित करते हुए 24 लाख 49 हजार 926 रुपए, इस तरह कुल 1करोड़ 12 लाख 44 हजार 44 रुपए की राशि जमा करवा ली। 1980 में प्राधिकरण ने 30 साल की लीज पर यह सिनेमा भूखंड आवंटित किया था और लीज नवीनीकरण के वक्त अन्य व्यावसायिक उपयोग का आरोप संचालकों पर भी लगा और लीज शर्तों के उल्लंघन के साथ आवंटन निरस्ती तक की प्रक्रियाप्राधिकरण ने की। मगर बाद में अदालती आदेश के चलते लीज बहाल करना पड़ी और फिर शासन ने जो मल्टी फ्लेक्स की पॉलिसी बनाई, उसके तहत नगर तथा ग्राम निवेश ने 2005 में मल्टीप्लेक्स का अभिन्यास मंजूर किया। वहीं प्राधिकरण ने भी इसके लिए एनओसी दे दी। मगर 2018 में बोर्ड संकल्प के आधार पर लीज डीड नवीनीकरण का निर्णय लेने के साथ कम्पाउंडिंग फीस की वसूली भी कर डाली और फ्री होल्ड की प्रक्रिया के साथ 1 करोड़ 60 लाख रुपए से अधिक की राशि जमा कराई गई, जिसमें 1 करोड़ 12 लाख रुपए तो कम्पाउंडिंग फीस और उस पर जीएसटी की राशि ली, गई। कुछ समय बाद सिनेमा संचालक ने इस आधार पर कम्पाउंडिंग फीस की राशि वापस मांगी कि जब लीज शर्तों का उल्लंघन भी हाईकोर्ट ने नहीं माना तो फिर 2018 के नियमों के तहत किस आधार पर कम्पाउंडिंग की फीस ली गई। लिहाजा यह राशि वापस लौटाई जाए, लेकिन प्राधिकरण ने उक्त आवेदन पर कोई ध्यान नहीं दिया और ना ही जमा की गई राशि लौटाई, जिसके चलते सिनेमा संचाल क ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की, जिसमें कोर्ट ने भी माना कि जब लीज शर्तों का उल्लंघन ही नहीं हुआ और प्राधिकरण ने खुद मल्टीफ्लेक्स की एनओसी दी और कम्पाउंडिंग फीस भी वसूल कर डाली, जिसके चलते हाईकोर्ट ने राशि लौटाने के निर्देश दिए। बावजूद इसके जब राशि नहीं लौटाई गई तो अवमानना याचिका दायर की गई, जिस पर नोटिस मिलने के बाद ताबड़तोड़ प्राधिकरण ने 6 प्रतिशत ब्याज के साथ 1 करोड़ 39 लाख 57 हजार 146 रुपए का चेक याचिकाकर्ता मेसर्स सुरेशचंद्र खंडेलवाल एंड कम्पनी के पक्ष में जारी कर दिया। इतना ही नहीं, प्राधिकरण सीईओ की ओर से तत्कालीन स्टेट ऑफिसर मनीष श्रीवास्तव ने शपथ-पत्र भी प्रस्तुत किया और उसके बाद हाईकोर्ट ने भी आदेश का पालन हो जाने पर याचिका निराकृत कर दी। यह मामला अवमानना याचिका क्रमांक 445/2026 से संबंधित रहा, जिसमें प्राधिकरण की ओर से जो जवाब दिया गया उसमें कहा गया कि यूनियन बैंक ऑफ इंडिया प्राधिकरण शाखा से जारी किया गया चैक याचिकाकर्ता को आदेश के मुताबिक ब्याज सहित सौंप दिया है।
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