
प्रशासन और निगम के पास पहले से ही एक हजार अवैध कॉलोनियों की सूची मौजूद, अब शासन द्वारा लाए जा रहे नए कानून के चलते कॉलोनी सेल तैयार करेगा सूची, साथ में बनेगी एसओपी भी
इंदौर। सालों से शासन-प्रशासन (Governance and Administration) , नगर निगम (Municipal council) अवैध कॉलोनियों (Illegal colonies) को वैध करने की कवायद में जुटा है और गिनती की कॉलोनियां ही वैध की जा सकी, क्योंकि कायदे-कानून इतने जटील है हीं, साथ ही विकास शुल्क की राशि जमा नहीं कराई जाती। अभी तक निगम ने जो सवा सौ कॉलोनियां वैध की है उसमें से 90 फीसदी से ज्यादा कॉलोनियों में विकास शुल्क की राशियां ही जमा नहीं हो सकी। वहीं दूसरी तरफ शासन अवैध कॉलोनियों पर पूर्ण नियंत्रण के लिए कड़े कानूनी प्रावधान लागू करने जा रही है। दूसरी तरफ प्रशासन भी नए सिरे से अवैध कॉलोनियों की सूची तैयार करवाने और इनसे जुड़े कॉलोनाइजरों पर एफआईआर दर्ज करवाने के दावे कर रहा है। कॉलोनी सेल इसके लिए एक एसओपी भई तैयार करेगा। अभी जनसुनवाई में संस्थाओं की जमीनों के साथ अवैध कॉलोनियों की शिकायतें भी सबसे अधिक आती है।
बीते 20 सालों में विधानसभा चुनावों से पहले भाजपा की सरकार अवैध कॉलोनियों को वैध करने का ढिंढोरा पीटती है और नतीजे में अभी तक ये कॉलोनियां वैध ही नहीं हो सकी है। मध्यप्रदेश नगर पालिक निगम 2021 के तहत वर्तमान में नियमितिकरण की जो प्रक्रिया चल रही है उसमें भी किसी भी कॉलोनी को नियम मुताबिक वैध करने की प्रक्रिया तो है ही नहीं, उसकी बजाय अधोसंरचना की अनुमति दी जाती है, जिसमें बगीचे, खुली जगह, सड़क, पेयजल, ड्रैनेज विकसित किया जाना है। कई वर्ष पूर्व तत्कालीन कलेक्टर आकाश त्रिपाठी ने अवैध कॉलोनियों की सूची पूरे जिले की तैयार करवाई थी और इसे आम जनता के लिए भी उपलब्ध करवाया। इसमें तहसीलवार अवैध कॉलोनियों की जानकारी दी गई, ताकि लोग इन कॉलोनियों में भूखंड ना खरीदें। मगर कुछ समय बाद ही इस तरह की नई कॉलोनियां तो कटने ही लगी, वहीं शासन ने नियमितिकरण की प्रक्रिया भी शुरू करवाई। हालांकि उसमें भी यह तय किया गया कि 31 दिसम्बर 2022 के पहले की कॉलोनियां ही वैध हो सकेंगी। इसके बाद काबिज होने वाली कॉलोनियों को ना सिर्फ सख्ती से हटाया जाएगा, बल्कि संबंधित कॉलोनाइजर के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज कराई जाएगी। निगम और कलेक्ट्रेट का कालोनी सेल लगातार अवैध कॉलोनाइजेशन के खिलाफ कार्रवाई करता रहा है। निगम के रिकॉर्ड में ही 600 से अधिक अवैध कॉलोनियां हैं और 400 से अधिक अवैध कॉलोनियां पंचायतों में भी पहले से चिन्हित है। अब कलेक्टर शिवम वर्मा ने कॉलोनी सेल को निर्देश दिए हैं कि अवैध कॉलोनियों के खिलाफ कार्रवाई सख्ती से की जाए और साथ ही एक एसओपी भी तैयार हो, ताकि आम जनता को इन अवैध कॉलोनियों की जानकारी मिल सके और इससे जुड़े दस्तावेज ऑनलाइन भी कर दिए जाएंगे, ताकि कोई भी व्यक्ति इसकी जानकारी ले सके। इतना ही नहीं, अवैध कॉलोनियों के साथ उन्हें चिन्हित कर संबंधित कॉलोनाइजरों के खिलाफ एफआईआर भी कराई जाएगी। मध्यप्रदेश शासन भी अवैध कॉलोनियों पर सख्ती से रोक के लिए कानून बना रहा है और इसके लिए मध्यप्रदेश कानून अधिनियम-2026 को लाया जा रहा है। नगरीय प्रशासन और विकास विभाग ने इससे जुड़े प्रावधान तैयार कर लिए हैं। शासन-प्रशासन का यह भी दावा है कि इस नए कानून में शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों की कॉलोनियों के तो अभी वर्तमान में अलग-अलग नियम और प्रक्रिया है, उसे भी समाप्त कर दिया जाएगा और एक समान अनुमति मिलेगी और अवैध कॉलोनियों के खिलाफ कार्रवाई भी एक जैसी हो सकेगी। इसके लिए एक डिजिटल पोर्टल तैयार किया जाएगा, जिसमें संबंधित विभाग जुड़े रहेंगे। अवैध कॉलोनियों में जमीनों की खरीद-फरोख्त या भूखंडों की खरीदी-बिक्री के लिए भी पंजीयन विभाग को भी इसमें शामिल किया जाएगा। इसके अलावा नगर तथा ग्राम निवेश, नजूल, प्राधिकरण और सहकारिता विभाग भी जुड़े रहेंगे।
©2026 Agnibaan , All Rights Reserved