
लीज का रिकॉर्ड है नहीं और भेज दिए नामांतरण के नोटिस…
इंदौर, डा जितेन्द्र जाखेटिया ।
नगर निगम (Municipal Corporation) द्वारा करोड़ों (Crores) रुपए कीमत की जमीनों (Land ) के मामले में एक बड़ा कारनामा कर दिखाया गया है। जिस जमीन की लीज (Lease) के दस्तावेज भी निगम के पास नहीं है, ऐसी एक सौ जमीनों पर नगर निगम द्वारा लीज का नामांतरण करने के लिए नोटिस जारी कर दिए गए हैं।
नगर निगम का लीज विभाग हमेशा किसी न किसी कारण से चर्चा का केंद्र बिंदु बन जाता है। इस समय इस विभाग ने शहर के अलग-अलग क्षेत्र में स्थित 100 जमीनों पर लीज नामांतरण आवेदन प्रस्तुत करने के लिए नोटिस भेज दिए हैं। जिन लोगों के पास नोटिस पहुंचे, वे लोग इस नोटिस को देखकर चौंक गए। चौंकने का कारण यह था कि इनमें से कई लोगों द्वारा कलेक्टर कार्यालय में जमीन की लीज की राशि बराबर हर साल भरी जा रही है। इसके बाद भी ऐसी जमीनों पर नगर निगम की ओर से लीज की राशि जमा करने और लीज का नामांतरण करने का नोटिस पहुंच गया है। निगम की ओर से भेजे गए नोटिस में कहा गया है कि निगम द्वारा किए गए लीज की संपत्तियों के सर्वे के दौरान यह संज्ञान में आया है कि आपके कब्जे में जो संपत्ति है, वह निगम के लीज रिकॉर्ड में दर्ज है और निगम द्वारा आवंटित की गई है। अब उक्त भूमि पर आप काबिज है, इसलिए इस जमीन का नामांतरण अपने नाम पर करने के लिए आवेदन प्रस्तुत करें।
निगम के पत्र में यह भी कहा गया है की अचल संपत्ति अंतरण नियम 2016 के नियम 14 अनुसार तथा लीज अनुबंध की शर्त के अनुसार लीज रेंट साल शुरू होते ही अग्रिम जमा करना होता है। अचल संपत्ति अंतरण नियम 2016 के नियम 19 में अंतरण का पंजीयन के अनुसार अचल संपत्ति में प्रत्येक अंतरण के अनुबंध का पंजीयन रजिस्ट्रीकरण अधिनियम 1908 के उपबंधों के अनुसार ही किया जाएगा। किसी भी प्रकार से संपत्ति के अंतरण की स्थिति में लीज के अधिकारों का नामांतरण एवं पंजीयन करना आवश्यक है। आपके द्वारा अंतरण के पश्चात नामांतरण न कराए जाने से निगम को नियम से मिलने वाली नामांतरण शुल्क की राशि तथा शासन को मिलने वाली पंजीयन और स्टाम्प शुल्क की राशि की हानि हो रही है। लीज अवधि में समुचित अनुमति प्राप्त किए बिना किसी भी माध्यम से भूखंड अंतरित किया जाना भी लीज शर्त का उल्लंघन है। इस पत्र में संबंधित व्यक्ति को निगम द्वारा लीज नामांतरण हेतु संबंधित दस्तावेजों के साथ आवेदन करने के लिए कहा गया है। इसके साथ में यह चेतावनी भी दी गई है कि नामांतरण न करवाने की स्थिति में अचल संपत्ति अंतरण नियम 4, 14, 19 का उल्लंघन होगा। अत: 15 दिन के अंदर नामांतरण का आवेदन प्रस्तुत करें, अन्यथा आपका अनाधिकृत कब्जा हटाकर बेदखली अधिनियम के तहत कार्रवाई की जाएगी। निगम द्वारा भेजे गए इस नोटिस के आधार पर जब कई लोग नगर निगम में पहुंचे और उन्होंने कहा कि नगर निगम में हमारी संपत्ति की लीज से संबंधित क्या दस्तावेज हैं, वह हम देखना चाहते हैं तो हकीकत यह थी कि निगम के पास में कोई दस्तावेज ही नहीं थे। इस बारे में निगम के लीज शाखा के जिम्मेदार व्यक्तियों का कहना था कि हमारे पास एक रजिस्टर में क्षेत्र का नाम लिखा हुआ मिला है। इससे यह स्पष्ट होता है कि यह जमीन नगर निगम द्वारा ही लीज पर दी गई होगी। जब संबंधित व्यक्तियों के द्वारा यह जानकारी दी गई कि हम कलेक्टर कार्यालय में लीज जमा करते हैं और वहां से ही हमारा लीज एग्रीमेंट हुआ है तो निगम के द्वारा संबंधितों को दस्तावेज प्रस्तुत करने के लिए निर्देशित किया गया है। नगर निगम के द्वारा बिना पुख्ता जानकारी और दस्तावेज के इस तरह के नोटिस बांट दिए जाने के कारण संबंधित लोगों में हडक़ंप मच गया है। निगम द्वारा नोटिस के साथ में लीज नामांतरण का आवेदन पत्र भी लगाकर भेजा गया है। यह नोटिस लीज शाखा के अपर आयुक्त आकाश सिंह के हस्ताक्षर से जारी किए गए हैं।
इनका कहना है…
लीज शाखा में ऐसे करीब 40 रजिस्टर है, जिसमें की अलग-अलग क्षेत्र की लीज पर दी गई जमीन की जानकारी दर्ज है। इनमें से जिन जमीन के मामले में पिछले 40 साल में कोई अपडेट नहीं हुआ है, ऐसे लोगों को हमारे द्वारा नोटिस जारी किए गए हैं। यदि किसी संपत्ति के मालिक कलेक्टर कार्यालय में लीज जमा कर रहे हैं तो वह उसके दस्तावेज प्रस्तुत करें। पहले के समय पर लीज व भवन अनुज्ञा का विभाग एक ही हुआ करता था। ऐसे में हर लीज की अलग-अलग फाइल विभाग के पास नहीं है।
-आकाश सिंह, अपर आयुक्त
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