
सरकारी माल… हाल बदहाल… ऐसा भंगार किया कि बोली में आवाज ही नहीं निकली…
आज और लगेगी बोली, फिर होगा निर्णय, 1 करोड़ का भंगार सामान पहले ही बेच चुके हैं
इंदौर। नगर निगम (Municipal council) के कई विभागों के अधीन चलने वाली गाड़ियों (Vehicles) से लेकर कई कचरा (Garbage) उठाने वाले वाहन जो भंगार (Scrap) हो चुके थे, उनकी नीलामी की प्रक्रिया कल से फिर शुरू की गई। हालत यह रही कि निगम की इन गाड़ियों के लिए भंगार की भी कीमत नहीं मिली। निगम की 147 छोटी-बड़ी गाड़ियों की नीलामी की बोली लगी, जिसमें 1 करोड़ 20 लाख रुपए तक के ऑफर आए। आज फिर दूसरे चरण में नीलामी की प्रक्रिया होगी और उसके बाद इसे फाइनल किया जाएगा।
नगर निगम में वर्षों पहले शहर में कचरा उठाने का काम संभालने वाली एटूझेड कंपनी को करीब 300 से ज्यादा वाहन दिए गए थे और करार खत्म होने तक कंपनी ने सारे वाहन भंगार कर दिए थे। भंगार वाहन ट्रेंचिंग ग्राउंड से लेकर कई अन्य झोनलों पर पटक दिए गए थे। लावारिस हालत में पटके गए वाहनों की हालत और खराब हो गई तो बाद में फिर उन्हें ट्रेंचिंग ग्राउंड पहुंचा दिया गया। नगर निगम अधिकारियों के मुताबिक करीब 147 छोटी-बड़ी गाड़ियां हैं। इनमें सर्वाधिक कचरा उठाने वाले वाहन हैं, जो अब पूरी तरह भंगार हो गए हैं और इनमें से कई वाहन ऐसे हैं, जिनकी शासन के नियमों के मान से भी मियाद खत्म हो चुकी है। कई विभागों के अफसरों की कमेटी बनाकर इसकी नीलामी प्रक्रिया शुरू की गई थी। कल दूसरे चरण में खटारा और भंगार वाहनों की नीलामी की बोली लगी। अफसरों के मुताबिक 1 करोड़ 20 लाख तक की बोली इन गाड़ियों के लिए लगाई गई और आज फिर नीलामी का क्रम जारी रहेगा। अगर आज फिर राशि बढ़कर मिलती है तो इसे फाइनल कर दिया जाएगा, अन्यथा पुरानी बोली पर कमेटी निर्णय लेगी। नगर निगम ने कई दिनों से वाहनों के साथ-साथ भंगार सामान की भी नीलामी की थी, जो नगर निगम के अलग-अलग गोडाउनों में पड़ा था। करीब 20 दिन पहले उक्त भंगार सामान की नीलामी से निगम को 1 करोड़ से अधिक की राशि मिली थी। इनमें कई पुरानी कचरापेटियां, भंगार हो चुके कचरा संसाधन और कई अन्य जालियों से लेकर विभिन्न सामग्री थी।
समय रहते नीलाम करते तो दस गुना कीमत आती…
नगर निगम के कई वाहन शुरुआती दौर में बार-बार खराब होना शुरू हुए तो उन्हें निगम के वाहनों के बेड़े से हटाकर झोनलों और ट्रेंचिंग ग्राउंड पर पटक दिया गया। इनमें कई ऐसे वाहन भी थे, जिनकी समयावधि पूरी हो चुकी थी। अगर उक्त सारे वाहन समयावधि में नीलाम किए जाते तो निगम को इससे दस गुना ज्यादा आय हो सकती थी, लेकिन बीते चार-पांच सालों से नीलामी के लिए प्रस्ताव ही कागजों में उलझे हुए थे।
©2026 Agnibaan , All Rights Reserved