
नई दिल्ली। पंजाब (Punjab) में गुटबाजी की चुनौती से जूझ रही कांग्रेस (Congress) के सामने अब राजस्थान (Rajasthan) में भी संगठनात्मक असहमति उभरती दिखाई दे रही है। भारत आदिवासी पार्टी (BAP) के सैकड़ों नेताओं को कांग्रेस में शामिल कराए जाने के बाद प्रदेश नेतृत्व और वरिष्ठ नेताओं के बीच मतभेद की चर्चा तेज हो गई है। यह कार्यक्रम पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की मौजूदगी में आयोजित किया गया था।
BAP नेताओं की एंट्री बनी विवाद की वजह
जानकारी के अनुसार, पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की मौजूदगी में आयोजित एक कार्यक्रम में करीब 300 BAP नेताओं ने कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण की। इस अभियान का नेतृत्व पूर्व मंत्री महेंद्र मालवीय ने किया। बताया जा रहा है कि इस कार्यक्रम की जानकारी प्रदेश कांग्रेस नेतृत्व को पहले से नहीं दी गई थी, जिससे संगठन के भीतर असंतोष पैदा हुआ।
प्रदेश अध्यक्ष ने जताई नाराजगी
राजस्थान कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने बिना किसी का नाम लिए इस घटनाक्रम पर अप्रत्यक्ष टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि यदि कोई व्यक्ति अपनी व्यक्तिगत ब्रांडिंग के लिए काम कर रहा है तो उन्हें शुभकामनाएं, लेकिन उनकी प्राथमिकता केवल कांग्रेस संगठन और पार्टी के हित हैं। उन्होंने कहा कि उनकी निष्ठा हमेशा कांग्रेस के प्रति रही है और वह किसी व्यक्ति विशेष की छवि निर्माण के लिए काम नहीं करेंगे।
दिल्ली तक पहुंचा मामला
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्रदेश नेतृत्व ने इस पूरे मामले की जानकारी पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व तक भी पहुंचाई है। सूत्रों के अनुसार, इस संबंध में वरिष्ठ नेताओं से चर्चा की गई है, हालांकि कांग्रेस की ओर से इस पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।
महेंद्र मालवीय पर भी टिप्पणी
डोटासरा ने पूर्व मंत्री महेंद्र मालवीय को लेकर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि जो नेता कांग्रेस छोड़कर गए, उन्हें चुनावी सफलता नहीं मिली। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि यदि कोई अपनी गलती स्वीकार कर पार्टी में लौटता है तो कांग्रेस उसका स्वागत करती है। साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि कोई पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होगा तो उसे स्वीकार नहीं किया जाएगा।
चार गुटों की चर्चा, लेकिन आधिकारिक पुष्टि नहीं
राजनीतिक हलकों में यह चर्चा भी है कि राजस्थान कांग्रेस एक बार फिर कई गुटों में बंटी नजर आ रही है। मीडिया रिपोर्ट्स में पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, कांग्रेस महासचिव सचिन पायलट, प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली के अलग-अलग प्रभाव वाले खेमों की बात कही जा रही है। हालांकि, पार्टी के किसी भी वरिष्ठ नेता ने इन दावों की पुष्टि नहीं की है। डोटासरा का कहना है कि कांग्रेस के सभी नेता संगठन के साथ मिलकर काम कर रहे हैं।
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