
भागलपुर: जाको राखे साइयां मार सके न कोई… यह कहावत और चमत्कार हुआ भागलपुर में. जब भगवान का दूसरा रूप कहने जाने वाले डॉक्टर ने महज 26 वें सप्ताह में सफल डिलीवरी कराई है. बच्चे का वजन मात्र 540 था. डॉक्टरों की टीम ने इसको सुरक्षित बचा लिया गया है. मेडिकल साइंस में यह चमत्कार से कम नहीं है. डॉक्टर का मानना है कि ऐसे केस में मात्र 1 प्रतिशत पॉजिटव रिजल्ट है. पर भागलपुर के निजी अस्पताल में यह चमत्कार हुआ है. और उस मां की सूनी गोद भर दी. जिन्हें पिछले 16 साल से अपने घर-आंगन में किलकारी गूंजने का इंतजार था.
दरअसल, मामला भागलपुर के पीरपैंती की रहने वाले एक कपल को 16 साल से बच्चे का इंतजार था. इसको लेकर बच्चे के पिता संजय ठाकुर ने बताया कि शादी को 16 साल हो गए थे. पर बच्चा नहीं हो रहा था. तभी आईवीएफ कराया. दो बार फेल हो गया. उसके बाद भागलपुर में आईवीएफ कराया गया. जिसके बाद बच्चे का जन्म हुआ तो लगा इसका बचना काफी मुश्किल है. लेकिन डॉक्टर ने बचाया है. जिसके बाद हमलोगों को काफी अच्छा लगा है.
डॉक्टरों की टीम द्वारा किए सफल प्रयास के बाद ठाकुर परिवार में खुशियों का महौल है. बच्ची की मां सुनीता देवी ने बताया मैं क्या कहूं. जिसका इंतजार पिछले 16 सालों से था. अब काफी अच्छा लग रहा है. इतने कम दिनों के बच्ची को बचा लिया गया है. 2007 के बाद से ही बच्चे की आस थी. बहुत इलाज भी कराया. लेकिन नहीं हो रहा था. अब जा कर किलकारी गूंजी है, तो काफी खुशी हो रही है.
इसको सफल बनाने वाले मेडी फोर्ट के डॉक्टर ने बताया कि ये दम्पति 24 वें सप्ताह में आएं. गर्भवती सुनीता देवी का वाटर डिस्चार्ज हो रहा था. जिसके बाद हमलोगों ने डिलीवरी कराने की सलाह दी. उसके बाद बच्ची का जन्म हुआ. बच्ची का वजन मात्र 540 ग्राम था. उन्होंने आगे बताया कि इतना कम वजन का बच्चा लाइफ में पहली बार बचाया है. इसको बचाना काफी मुश्किल है. लेकिन पूरी टीम की मेहनत से इसको बचाया गया. ऐसे मामलों में पूरे भारत में 1 परसेंट बच्चे ही बच पाते हैं. अब बच्ची 1600 ग्राम की हो चुकी है. पहले ऐसे केस में इसको मुंबई जाना पड़ता था. लेकिन अब यहां ही सम्भव हो पा रहा है. सबसे खास बात की इस बच्ची की सभी अंग सुरक्षित है. इसका आंख, नाक, कान, ह्रदय, फेफड़ा सब कुछ सही किया गया है. उसका भविष्य उज्जवल हो यही प्रार्थना है.
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