
नई दिल्ली। हिंदू पंचांग के(According to the Hindu Panchang,) अनुसार इस वर्ष ज्येष्ठ माह में अधिक मास(Adhik Maas) का विशेष संयोग(special celestial alignment) बन रहा है। इसी कारण(month of Jyeshtha) ज्येष्ठ पूर्णिमा(Jyeshtha Purnima 2026) को लेकर श्रद्धालुओं में खास उत्साह है। यह पावन पूर्णिमा मां लक्ष्मी और भगवान विष्णु की उपासना के लिए अत्यंत शुभ मानी जाती है।
पंचांग गणना के अनुसार(Based on Panchang calculations) पूर्णिमा तिथि 30 मई 2026 को दोपहर 11:57 बजे से शुरू होकर 31 मई 2026 को दोपहर 02:14 बजे तक रहेगी। उदयातिथि के अनुसार इस बार पूर्णिमा का व्रत 31 मई 2026 को रखा जाएगा।
शुभ मुहूर्त
इस दिन पूजा के लिए कई महत्वपूर्ण समय बताए गए हैं—
ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04:02 से 04:43 तक
विजय मुहूर्त: दोपहर 02:27 से 03:37 तक
गोधूलि मुहूर्त: शाम 06:38 से 07:01 तक
निशिता मुहूर्त: रात 07:13 से 07:33 तक
सूर्य और चंद्र समय
सूर्योदय: सुबह 05:24 बजे
सूर्यास्त: शाम 07:14 बजे
चंद्रोदय: शाम 07:36 बजे
पूजन विधि और महत्व
इस दिन श्रद्धालु सुबह जल्दी उठकर स्नान करते हैं और स्वच्छ वस्त्र धारण करते हैं। घर के मंदिर की सफाई कर गंगाजल से शुद्धिकरण किया जाता है। इसके बाद भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की स्थापना कर दीप, धूप, पुष्प और भोग अर्पित किया जाता है।
व्रत कथा का पाठ, विष्णु चालीसा और मंत्र जाप करना अत्यंत शुभ माना गया है। साथ ही मौसमी फल और मिठाई का भोग लगाकर पूजा पूर्ण की जाती है।धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन दान-पुण्य करने से पापों का नाश होता है और घर में सुख-समृद्धि व धन-वैभव की वृद्धि होती है।
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