सोमनाथ। गुजरात के प्रभास पाटन में स्थित सोमनाथ मंदिर (Somnath Temple) सिर्फ एक धार्मिक धरोहर नहीं, बल्कि भारत की अटूट आस्था, संघर्ष और पुनर्निर्माण का जीवंत प्रतीक माना जाता है। 12 ज्योतिर्लिंगों (Jyotirlingas) में प्रथम सोमनाथ मंदिर ने बीते करीब 1300 वर्षों में बार-बार हमले, लूट और विध्वंस झेला, लेकिन हर बार यह पहले से ज्यादा भव्य रूप में फिर खड़ा हो गया।
इतिहासकारों के मुताबिक सोमनाथ मंदिर पर कई बार हमले हुए, लेकिन सात बड़े आक्रमण ऐसे रहे जिन्होंने पूरे देश को झकझोर दिया। इसके बावजूद राजाओं, संतों और श्रद्धालुओं ने इस मंदिर के अस्तित्व को कभी मिटने नहीं दिया।
इतिहास के अनुसार सोमनाथ का भव्य निर्माण 649 ईस्वी में मैत्रक राजाओं ने करवाया था। लेकिन 725 ईस्वी में सिंध के अरब गवर्नर अल जुनैद ने मंदिर पर हमला कर भारी नुकसान पहुंचाया। यह सोमनाथ पर पहला बड़ा विदेशी आक्रमण माना जाता है।
2. नागभट्ट का पुनर्निर्माण और गजनवी का हमला
815 ईस्वी में प्रतिहार शासक नागभट्ट द्वितीय ने मंदिर का दोबारा निर्माण कराया। इसके बाद 1025 ईस्वी में महमूद गजनवी ने सोमनाथ पर हमला किया। कहा जाता है कि उसने मंदिर को लूटने के साथ बड़े पैमाने पर नरसंहार भी किया था। यह हमला भारतीय इतिहास के सबसे चर्चित आक्रमणों में गिना जाता है।
3. राजा भोज और भीमदेव ने फिर बसाया
गजनवी के हमले के बाद परमार राजा भोज और सोलंकी राजा भीमदेव ने मंदिर को दोबारा खड़ा किया। लेकिन 1299 ईस्वी में अलाउद्दीन खिलजी के सेनापति उलूग खान ने गुजरात अभियान के दौरान फिर सोमनाथ को निशाना बनाया और मंदिर को क्षति पहुंचाई।
4. कुमारपाल ने सजाया, जफर खान ने तोड़ा
राजा कुमारपाल ने मंदिर को भव्य नक्काशी और रत्नों से सजाया। मगर 1395 ईस्वी में दिल्ली सल्तनत के गवर्नर जफर खान ने हमला कर मंदिर को फिर तहस-नहस कर दिया।
5. महिपाल का संकल्प और बेगड़ा का कहर
चूड़ासमा वंश के राजा महिपाल प्रथम ने 14वीं सदी में मंदिर का पुनर्निर्माण कराया। लेकिन 1451 ईस्वी में गुजरात के शासक महमूद बेगड़ा ने हमला कर मंदिर को फिर ध्वस्त कर दिया और पूजा-पाठ पर रोक लगा दी।
6. औरंगजेब का फरमान और अहिल्याबाई की आस्था
मुगल शासक औरंगजेब ने 17वीं सदी में मंदिर को गिराने का आदेश दिया। इसके बाद 1783 में इंदौर की महारानी अहिल्याबाई होल्कर ने खंडहर के पास नया मंदिर बनवाया, जिसे आज भी पुराने सोमनाथ मंदिर के रूप में जाना जाता है।
7. आजादी के बाद फिर लौटी भव्यता
स्वतंत्रता के बाद सरदार वल्लभभाई पटेल ने सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण का संकल्प लिया। उनके प्रयासों और देशभर के सहयोग से 1951 में वर्तमान भव्य सोमनाथ मंदिर तैयार हुआ। आज यह मंदिर भारतीय संस्कृति, श्रद्धा और आत्मसम्मान की सबसे बड़ी पहचान बन चुका है।
सोमनाथ का इतिहास केवल मंदिर के टूटने और बनने की कहानी नहीं है, बल्कि यह उस विश्वास का प्रतीक है जिसे सदियों तक कोई ताकत मिटा नहीं सकी।
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