नई दिल्ली। टाटा समूह (Tata Group) की होल्डिंग कंपनी टाटा संस (Tata Sons) की शेयर बाजार में सूचीबद्धता (Listing on the stock exchange) को लेकर भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने अपना रुख स्पष्ट कर दिया है। आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा (RBI Governor Sanjay Malhotra) ने कहा है कि केंद्रीय बैंक के नियमों के तहत अपर लेयर की गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी (एनबीएफसी) की श्रेणी में आने वाली कंपनियों के लिए शेयर बाजार में सूचीबद्ध होना अनिवार्य है। उनका यह बयान ऐसे समय में आया है, जब टाटा संस लिस्टिंग के बजाय दूसरे विकल्पों पर विचार करने के लिए आरबीआई से संपर्क करने की तैयारी में है।
पब्लिक फंड तक पहुंच से पैदा होता है जोखिम
आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने टाटा संस को अपर लेयर की एनबीएफसी के रूप में वर्गीकृत किए जाने को उचित ठहराया। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक धन तक प्रत्यक्ष या परोक्ष पहुंच रखने वाली बड़ी एनबीएफसी और मुख्य निवेश कंपनियों (सीआईसी) का आरबीआई के साथ पंजीकृत होना जरूरी है।
मल्होत्रा के अनुसार, टाटा संस जैसी बड़ी एनबीएफसी और सीआईसी समूह की कंपनियों के शीर्ष पर होती हैं। ये कंपनियां धन जुटाने के लिए समूह की अन्य कंपनियों की वित्तीय स्थिति और बहीखातों का सहारा लेती हैं। इससे सार्वजनिक धन के लिए प्रणालीगत जोखिम पैदा हो सकता है।
उन्होंने कहा कि सार्वजनिक धन कॉरपोरेट बॉन्ड, बैंकों और अन्य माध्यमों से आता है। इसलिए ऐसी कंपनियों का आरबीआई के साथ पंजीकरण आवश्यक है। हालांकि, जिन सीआईसी की सार्वजनिक धन तक प्रत्यक्ष या परोक्ष पहुंच नहीं होती, उन्हें पंजीकरण की अनिवार्यता से छूट दी गई है।
आरबीआई गवर्नर ने स्पष्ट किया कि यदि कोई कंपनी केंद्रीय बैंक की परिभाषा के तहत अपर लेयर की एनबीएफसी की श्रेणी में आती है, तो उसके लिए शेयर बाजार में सूचीबद्ध होना भी जरूरी है।
पिछले महीने आरबीआई ने टाटा संस की एनबीएफसी पंजीकरण प्रमाणपत्र लौटाने की अर्जी खारिज कर दी थी। इस फैसले से कंपनी की शेयर बाजार में सूचीबद्धता की संभावना बढ़ गई है।
टाटा संस को सितंबर 2022 में अपर लेयर की एनबीएफसी के रूप में वर्गीकृत किया गया था। कंपनी ने मार्च 2024 में इस श्रेणी से बाहर निकलने के उद्देश्य से पंजीकरण समाप्त करने के लिए आवेदन किया था। इस दिशा में पात्रता हासिल करने के लिए कंपनी ने अपना कर्ज भी चुका दिया था। इसके बावजूद आरबीआई ने पंजीकरण प्रमाणपत्र लौटाने की मांग स्वीकार नहीं की।
लिस्टिंग को लेकर टाटा समूह में मतभेद
इस बीच, टाटा संस का निदेशक मंडल संभावित सूचीबद्धता से जुड़े कदम आगे बढ़ा चुका है। हालांकि, समूह के भीतर इस मुद्दे पर मतभेद सामने आए हैं और कंपनी ने अन्य विकल्पों पर विचार करने की बात भी कही है।
हाल ही में हुई टाटा संस की बैठक में टाटा ट्रस्ट के चेयरमैन नोएल टाटा ने शेयर बाजार में सूचीबद्धता का विरोध किया था। उन्होंने कंपनी को आरबीआई के समक्ष नए विकल्पों के साथ जाने की सलाह दी थी। ऐसे में अब टाटा संस के सामने नियामकीय नियमों का पालन करने और लिस्टिंग के विकल्प पर समूह के भीतर सहमति बनाने की चुनौती है।
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