मुंबई। महाराष्ट्र शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) पेपर लीक मामले में जांच एजेंसियों को बड़ी सफलता मिली है। मामले के मुख्य आरोपी बिजेंद्र कुमार गुप्ता (Bijendra Kumar Gupta) और उसके सहयोगी इंद्रजीत सिंह उर्फ पीकू को गिरफ्तार करने के बाद अदालत ने दोनों को 30 जुलाई तक पांच दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया है। इसके साथ ही इस मामले में गिरफ्तार आरोपियों की संख्या बढ़कर 14 हो गई है।
पटना से दबोचा गया मुख्य आरोपी
पुलिस के अनुसार, मुख्य आरोपी बिजेंद्र कुमार बालेश्वर शाह उर्फ बिजेंद्र कुमार गुप्ता पिछले करीब एक महीने से फरार चल रहा था। उसकी तलाश में महाराष्ट्र पुलिस ने कई राज्यों में छापेमारी की और आखिरकार उसे बिहार की राजधानी पटना से गिरफ्तार कर लिया। उसके साथ सहयोगी इंद्रजीत सिंह उर्फ पीकू को भी पकड़ा गया। दोनों को भिवंडी लाकर पूछताछ की गई और फिर अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें पुलिस हिरासत में भेज दिया गया।
जांच में सामने आया है कि गिरफ्तार आरोपी लीक हुए प्रश्नपत्र बेचने के नेटवर्क का हिस्सा थे। पुलिस को कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR), लोकेशन डेटा और व्हाट्सएप चैट के जरिए महत्वपूर्ण सुराग मिले, जिनके आधार पर आरोपियों तक पहुंच बनाई गई। अधिकारियों के मुताबिक बिजेंद्र गुप्ता के खिलाफ ओडिशा में धोखाधड़ी का एक अन्य मामला भी दर्ज है।
24 घंटे पहले लीक हुए थे परीक्षा के चार सेट
पुलिस जांच के अनुसार, 28 जून को प्रस्तावित महाराष्ट्र TET परीक्षा के प्रश्नपत्रों के चार सेट परीक्षा से लगभग 24 घंटे पहले लीक हो गए थे। शुरुआती जांच में सामने आया कि इन पेपरों को करीब 1.5 करोड़ रुपये में बेचने की तैयारी की जा रही थी। पेपर लीक का खुलासा होने के बाद परीक्षा को स्थगित कर दिया गया।
जांच एजेंसियों का कहना है कि अब उनका मुख्य फोकस पूरे पेपर लीक नेटवर्क का पर्दाफाश करना है। यह पता लगाया जा रहा है कि इस गिरोह में लोगों की भर्ती कैसे होती थी, प्रश्नपत्र किस स्तर पर लीक किए जाते थे और उन्हें परीक्षार्थियों तक पहुंचाने की पूरी प्रक्रिया क्या थी। पुलिस का मानना है कि आगे की पूछताछ में इस रैकेट से जुड़े और लोगों के नाम सामने आ सकते हैं।
नीट पेपर लीक विवाद के बीच आया मामला
महाराष्ट्र TET पेपर लीक का यह मामला ऐसे समय सामने आया जब देशभर में मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET में कथित पेपर लीक को लेकर विरोध प्रदर्शन चल रहे थे। इसी दौरान केंद्र सरकार ने आंदोलनकारी संगठन सीजेपी (CJP) की प्रमुख मांगों को स्वीकार किया। इसके बाद तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दिया और केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया। आंदोलन भी इसके बाद समाप्त हो गया।
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