
भोपाल। मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) में आंगनबाड़ियों की बदहाल व्यवस्था और पूरक पोषण आहार में वित्तीय अनियमितताओं को लेकर नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक की रिपोर्ट के बाद सूबे की सियासत गरमा गई है। कैग की रिपोर्ट बताती है कि प्रदेश में साढ़े आठ हजार से ज्यादा आंगनबाड़ी ही नहीं हैं। विधानसभा में पेश की गई कैग रिपोर्ट में प्रदेश की स्वास्थ्य, पोषण और बाल विकास व्यवस्थाओं को लेकर कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। जिसके बाद सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है।
कैग की रिपोर्ट के मुताबिक प्रदेश के कुल 54,903 गांवों में से 8,842 गांवों मतलब लगभग 16 फीसदी में आंगनबाड़ी केंद्र ही नहीं हैं। जहां ये केंद्र संचालित हो रहे हैं। वहां भी बुनियादी सुविधाओं की भारी किल्लत है। कई केंद्रों में पेयजल, शौचालय, खेल मैदान, रसोईघर और स्टोर रूम जैसी आवश्यक व्यवस्थाएं नहीं पाई गईं। रिपोर्ट के अनुसार विभागीय नियमों के विपरीत समितियों को 2.04 करोड़ का नियम विरुद्ध भुगतान किया गया।
कांग्रेस का आरोप – नवजात और छोटे बच्चों का पैसा डकार रही सरकार
कैग की इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता राहुल राज ने सरकार को घेरते हुए कहा सरकार दावा करती है कि मातृ शिशु धाम के मामले में मध्य प्रदेश नंबर एक है, लेकिन जमीनी हकीकत और कुपोषण के आंकड़े कुछ और ही स्थिति बयां कर रहे हैं। विशेषकर आदिवासी अंचलों की स्थिति बेहद खराब है। 8,842 गांवों में आंगनबाड़ी केंद्र ही नहीं हैं। आखिर इन योजनाओं का बजट कहां जा रहा है? किसकी जेब में जा रहा है और इसे कौन डकार रहा है?
राहुल राज ने आगे आरोप लगाया कि कैग रिपोर्ट यह भी बताती है कि सरकार 61 हजार करोड़ का हिसाब तक नहीं दे पाई है। भ्रष्टाचार इस कदर चरम सीमा पर है कि छोटे-छोटे बच्चों और नवजात शिशुओं तक का भोजन खाया जा रहा है। यह सरकार महिलाओं के हक के पैसे, कर्मचारियों के पैसे और मजदूरों के पैसे तक नहीं छोड़ रही है। इनके लिए तो बस वही पुरानी कहावत सच साबित हो रही है खाता न बही, जो यह कहें वही सही।
बीजेपी का पलटवार – रिपोर्ट का अध्ययन कर रहे हैं, कांग्रेस संवेदनशील मुद्दों पर राजनीति न करें
विपक्ष के इन तीखे हमलों पर पलटवार करते हुए बीजेपी के प्रदेश प्रवक्ता अजय सिंह यादव ने सरकार की उपलब्धियों का हवाला दिया और कांग्रेस को अपने कार्यकाल की याद दिलाई। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार ने आंगनबाड़ियों के सशक्तिकरण और मातृ-शिशु स्वास्थ्य के लिए जो योजनाएं बनाई हैं, उनके सकारात्मक परिणाम जमीन पर दिख रहे हैं। प्रदेश में संस्थागत प्रसव का ग्राफ तेजी से बढ़ा है और बाल मृत्यु दर में उल्लेखनीय कमी आई है। गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य और कल्याण के लिए लगातार नई-नई सौगातें दी जा रही हैं।
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