
नई दिल्ली: हाल ही में सरकार ने लोगों से एक साल तक सोना न खरीदने की अपील की थी. ऐसे में यह चर्चा तेज हो गई कि सरकार अब घर और मंदिरों में पड़े सोने को मार्केट में ला सकता है. लेकिन इस बीच सरकार ने इन सारी अफवाहों और अटकलों को खारिज करते हुए मंगलवार को कहा कि देशभर के मंदिरों के ट्रस्ट या किसी भी धार्मिक संस्थानों के पास रखे सोने का मुद्रीकरण करने का उसका कोई इरादा नहीं है.
वित्त मंत्रालय ने इसपर कहा कि ऐसी अफवाहें पूरी तरह झूठी, भ्रामक और निराधार हैं. मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि मंदिरों के शिखरों, दरवाजों या अन्य संरचनाओं पर लगे सोने को भारत के सामरिक स्वर्ण भंडार के रूप में मानने के दावे भी झूठे, भ्रामक एवं पूरी तरह निराधार हैं. मंत्रालय ने नागरिकों से अपील की कि वे ऐसी अफवाहों पर विश्वास न करें और न ही उन्हें फैलाएं. अपुष्ट जानकारी फैलाने से अनावश्यक भ्रम उत्पन्न होता है और यह लोगों को गुमराह कर सकता है.
सरकार ने सभी नागरिकों से केवल अधिकृत माध्यमों से जारी आधिकारिक सूचनाओं पर ही भरोसा करने की अपील की. मंत्रालय ने कहा कि नीतिगत फैसलों या सरकारी योजनाओं से संबंधित कोई भी जानकारी आधिकारिक प्रेस विज्ञप्तियों, सरकारी वेबसाइट और सत्यापित सार्वजनिक संचार मंचों के माध्यम से साझा की जाएंगी.
दिलचस्प बात ये है कि भारत के मंदिरों और घरों में रखा सोना कई देशों के केंद्रीय बैंक के गोल्ड रिजर्व से भी ज्यादा माना जाता है. तुलना करें तो भारत सरकार और आरबीआई के पास आधिकारिक तौर पर करीब 880 टन गोल्ड रिजर्व है. वहीं मंदिरों की बात करें तो हालांकि मंदिरों में मौजूद कुल सोने का कोई आधिकारिक सरकारी आंकड़ा नहीं है, लेकिन अलग-अलग रिपोर्ट्स और जानकारों के अनुमान बताते हैं कि देश के मंदिरों में करीब 3,000 से 4,000 टन तक सोना हो सकता है. यह मात्रा कई देशों के केंद्रीय बैंकों के गोल्ड रिजर्व से भी ज्यादा मानी जाती है. हाल ही में सोशल मीडिया पर ये अफवाह भी चली थी कि सरकार मंदिरों का सोना बेच सकती है, लेकिन वित्त मंत्रालय ने इसे पूरी तरह गलत बताया.
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