
नई दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय बाजार (International Market) में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में बड़ी गिरावट देखने को मिली है, लेकिन इसके बावजूद भारत (India) में पेट्रोल और डीजल (Petrol and Diesel) के दाम लगातार बढ़ रहे हैं। बीते एक हफ्ते में दूसरी बार ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी की गई है, जिससे आम उपभोक्ताओं पर महंगाई का दबाव और बढ़ गया है।
19 मई को पेट्रोल के दाम में 87 पैसे और डीजल के दाम में 91 पैसे प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई है। इससे पहले भी कीमतों में करीब 3 रुपये प्रति लीटर का इजाफा हुआ था। इस तरह एक हफ्ते में पेट्रोल करीब 3.87 रुपये और डीजल 3.91 रुपये प्रति लीटर महंगा हो चुका है।
कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट
वैश्विक बाजार में आज कच्चे तेल के दाम में 2.5% से अधिक की गिरावट दर्ज की गई। ब्रेंट क्रूड 109.56 डॉलर प्रति बैरल और WTI क्रूड 102 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया है। यह गिरावट अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस बयान के बाद आई है, जिसमें उन्होंने ईरान पर सैन्य कार्रवाई रोकने और बातचीत को प्राथमिकता देने की बात कही। माना जा रहा है कि मिडिल ईस्ट में तनाव कम होने के संकेत और हमले टलने के फैसले से वैश्विक बाजार में तेल की कीमतों पर दबाव कम हुआ है।
रूस से भी भारत को राहत
भारत के लिए एक और राहत की खबर रूस से जुड़ी है। अमेरिका ने रूसी समुद्री तेल पर लगाए गए प्रतिबंधों में दी गई छूट को 30 दिनों के लिए और बढ़ा दिया है। इससे भारत को रूसी तेल की खरीद जारी रखने में आसानी होगी, क्योंकि भारत रूस से बड़े पैमाने पर कच्चा तेल आयात करता है।
फिर क्यों बढ़ रहे हैं पेट्रोल-डीजल के दाम?
अंतरराष्ट्रीय बाजार में राहत के संकेतों के बावजूद भारत में ईंधन महंगा हो रहा है। इसके पीछे कई कारण बताए जा रहे हैं। मिडिल ईस्ट में जारी तनाव और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर अनिश्चितता के कारण तेल कंपनियों की लागत और जोखिम बढ़ा है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, पहले तेल कंपनियों को भारी घाटा हो रहा था, जो बढ़कर रोजाना करीब 1000 करोड़ रुपये तक पहुंच गया था। एक्साइज ड्यूटी में कटौती के बावजूद कंपनियों का नुकसान पूरी तरह खत्म नहीं हो पाया है। कीमतों में पहले की बढ़ोतरी के बाद भी कंपनियों का घाटा कम हुआ है, लेकिन अभी भी प्रति लीटर पेट्रोल और डीजल पर नुकसान बना हुआ है। इसी वजह से कंपनियों को दाम बढ़ाने का फैसला लेना पड़ा है।
आगे क्या हो सकता है?
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि अगर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव बना रहता है तो आने वाले दिनों में कच्चे तेल और ईंधन की कीमतों में और उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।
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