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अमेरिका-ईरान समझौते पर मोजतबा खामेनेई का पहला बयान, बोले- ट्रंप ने डील के लिए लगाया पूरा जोर

June 19, 2026

तेहरान। अमेरिका और ईरान (The United States and Iran) के बीच हाल ही में हुए युद्धविराम एवं समझौते को लेकर ईरान के सर्वोच्च नेता के बेटे और प्रभावशाली धार्मिक-राजनीतिक शख्सियत मोजतबा खामेनेई (Mojtaba Khamenei) का पहला सार्वजनिक बयान सामने आया है। उन्होंने कहा कि इस समझौते को लेकर उनके मन में कई सवाल और आपत्तियां थीं, लेकिन देश के शीर्ष नेतृत्व के भरोसे के बाद उन्होंने इसे मंजूरी दी।

मोजतबा खामेनेई ने कहा कि राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े वरिष्ठ अधिकारियों ने उन्हें आश्वस्त किया था कि समझौते में ईरान के राष्ट्रीय हितों और उसके सहयोगियों के हितों की पूरी तरह रक्षा की जाएगी। इसी भरोसे के आधार पर उन्होंने सहमति दी।

‘डील कराने के लिए ट्रंप ने हर संभव प्रयास किया’

अमेरिका-ईरान समझौते पर अपनी पहली प्रतिक्रिया देते हुए मोजतबा खामेनेई ने दावा किया कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस समझौते को अंतिम रूप देने के लिए बेहद उत्सुक थे। उन्होंने आरोप लगाया कि ट्रंप प्रशासन ने समझौते को अस्तित्व में लाने के लिए हर तरह के दबाव और राजनीतिक प्रभाव का इस्तेमाल किया।

उन्होंने कहा कि उनकी व्यक्तिगत राय समझौते को लेकर अलग थी, लेकिन राष्ट्रपति और सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सदस्यों की प्रतिबद्धता को देखते हुए उन्होंने इसका समर्थन किया।


  • आलोचकों को दिया संदेश

    ईरान में इस समझौते को लेकर उठ रहे सवालों के बीच मोजतबा खामेनेई ने आलोचकों को भी संदेश दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि अमेरिका के साथ भविष्य में होने वाली प्रत्यक्ष वार्ताओं का अर्थ यह नहीं है कि ईरान अमेरिकी नीतियों या दृष्टिकोण को स्वीकार कर रहा है।

    उनका कहना था कि बातचीत का उद्देश्य केवल राष्ट्रीय हितों की रक्षा करना है, न कि किसी दूसरे देश के नजरिए को अपनाना।

    अमेरिका को दी चेतावनी

    मोजतबा खामेनेई ने चेतावनी भरे अंदाज में कहा कि यदि अमेरिका भविष्य की वार्ताओं में ईरान पर अतिरिक्त या अस्वीकार्य शर्तें थोपने की कोशिश करेगा तो तेहरान उन्हें स्वीकार नहीं करेगा। उन्होंने दोहराया कि ईरान अपने अधिकारों और रणनीतिक हितों से किसी भी कीमत पर समझौता नहीं करेगा।

    60 दिनों की बातचीत पर दुनिया की नजर

    मोजतबा खामेनेई का यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच समझौते के बाद 60 दिनों की वार्ता प्रक्रिया शुरू हो रही है। माना जा रहा है कि इस अवधि में दोनों देश कई विवादित मुद्दों पर बातचीत करेंगे। ऐसे में ईरानी नेतृत्व की ओर से आया यह बयान न केवल घरेलू राजनीति बल्कि अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    यह टिप्पणी ईरान की आंतरिक निर्णय प्रक्रिया की भी एक दुर्लभ झलक पेश करती है, जिससे संकेत मिलता है कि समझौते को लेकर देश के शीर्ष स्तर पर व्यापक चर्चा और मतभेद मौजूद थे, लेकिन अंततः राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता देते हुए आगे बढ़ने का फैसला किया गया।

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