img-fluid

शहर में 20 से ज्यादा पेट शॉप्स, रजिस्ट्रेशन सिर्फ 10 के पास

June 23, 2026

  • ऑन डिमांड बिक रहे प्रतिबंधित कछुए-लायसेंसी कहकर नकली नस्ल के जानवर भी बेचते देते हैं

उज्जैन। शहर में पशु पक्षी पालने को लेकर लोगों का रुझान लगातार बढ़ता जा रहा हैं। ऐसे में पालतू वन्य प्राणी बेचने वालों की दुकानें भी खुलती जा रही हैं। हैरानी की बात है कि संचालित ज्यादातर पेट शॉप के संचालकों ने अपनी दुकान का पंजीयन ही नहीं कराया है। इस पर न तो पशु पालन विभाग ध्यान दे रहा है और ना ही उज्जैन का वन विभाग।



  • उल्लेखनीय है कि भारत सरकार के पेट शॉप रूल्स के तहत देशभर में कुत्ता, बिल्ली, मूषक, चूहिया तथा पिजरा बंद पक्षी का व्यापार करने वाले या आनलाइन क्रय-विक्रय करने वालों को पशु पालन विभाग में रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य है। इसके बाद विभाग के अधिकारियों द्वारा इसकी मॉनिटरिंग की जाती है कि जानवरों को सही तरह से रख रहे हैं या नहीं, दुकान में जानवरों को रखने के लिए पर्यात जगह है या नहीं। उनको पर्याप्त मात्रा में सुविधाएं मिल रही हैं या नहीं, यदि दुकान संचालकों द्वारा मानकों का पालन नहीं किया जाता है तो उनके खिलाफ विभाग कार्रवाई करता है। इसके साथ ही यदि कोई पेट शॉप संचालक संरक्षित प्रजाति में शामिल किए गए पशु-पक्षियों की खरीदी बिक्री करते पाया जाता है तो उस पर कार्रवाई करने का अधिकार वन विभाग का होता है। पर आलम यह है कि दोनों ही विभाग के अधिकारियों द्वारा नरमी बरतने की वजह से ज्यादातर दुकान संचालक भारत सरकार के नियम को ठेंगा दिखा रहे हैं। कई दुकान संचालक तो प्रतिबंधित कछुओं और संरक्षित प्रजाति के पशु पक्षियों की भी बिक्री कर रहें है। जो ऑन डिमांड लोगों तक पहुंचाए जा रहे है।

    रजिस्ट्रेशन पांच वर्ष के लिए मान्य
    मिली जानकारी के मुताबिक हर पेट शॉप का पंजीयन पांच वर्ष के मान्य रहता है। उसके बाद फिर आवेदन कर नवीनीकरण कराना पड़ता है लेकिन अग्रिबाण की पड़ताल में यह साफ हुआ कि अधिकांश दुकानदारों ने रजिस्ट्रेशन ही नहीं कराया है। वर्तमान में उज्जैन शहर में करीब 20 से ज्यादा पेट शॉप संचालित हो रहे है, लेकिन पशु पालन विभाग द्वारा सिर्फ 10 दुकानों का पंजीयन किया गया हैं।

    पशु क्रूरता निवारण समिति को भी जानकारी नहीं
    उज्जैन में पशु क्रूरता अधिनियम का कड़ाई से पालन हो, अधिनियम के खिलाफ कार्य करने वालों पर कार्रवाई हो सके। इसकी निगरानी के लिए 2003 में जिला पशु क्रूरता निवारण समिति उज्जैन का गठन किया गया था। उज्जैन पशु क्रूरता निवारण समिति में एक संयोजक, एक सह संयोजक और 13 सदस्य है। इसकी मॉनिटरिंग उज्जैन कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक के पास है। अधिनियम के नियमों को पालन करवाने की जिम्मेदारी नगर निगम आयुक्त, मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत, वनमण्डला अधिकारी, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, जिला परिवहन अधिकारी, उप संचालक पशु चिकित्सा, जिला जनसंपर्क अधिकारी, जिला शिक्षा अधिकारी सहित समिति के अन्य सदस्यों की होती है। पर शहर में बढ़ते अनियमित पेट शॉप्स पर समिति के सदस्यों को भी कोई जानकारी नहीं हैं।

    Share:

  • चालीस लाख की चोरी का हुआ खुलासा... 6 लाख के आभूषण सहित 70 हजार नकदी बरामद, एक आरोपी पकड़ाया

    Tue Jun 23 , 2026
    7 दिन का पुलिस रिमांड, दो अन्य आरोपियों की तलाश नागदा। मंडी पुलिस ने सुनील नगर के सूने मकान में हुई करीब चालीस लाख की चोरी का सोमवार को खुलासा करते हुए एक आरोपी के गिरफ्तार होने की जानकारी दी। आरोपी से करीब 6 लाख रुपए के सोने के आभूषण और 70 हजार रुपए नकदी […]
    सम्बंधित ख़बरें
    लेटेस्ट
    खरी-खरी
    का राशिफल
    जीवनशैली
    मनोरंजन
    अभी-अभी
  • Archives

  • ©2026 Agnibaan , All Rights Reserved