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दिल्ली जिमखाना क्लब विवाद के बीच चर्चा में मुंबई का ब्रीच कैंडी क्लब, जहां आज भी यूरोपियन ट्रस्ट का दबदबा

May 27, 2026

नई दिल्ली। राजधानी का चर्चित दिल्ली जिमखाना क्लब (Delhi Gymkhana Club) इन दिनों सरकारी नोटिस और विशेषाधिकारों को लेकर बहस के केंद्र में है। इसी बीच मुंबई का ऐतिहासिक ब्रीच कैंडी क्लब (Candy Club) भी चर्चा में आ गया है, जिसकी पहचान आज भी देश के सबसे एलीट और विवादित क्लबों में होती है। दक्षिण मुंबई स्थित यह क्लब वर्षों तक केवल यूरोपियनों के लिए आरक्षित रहा और अब भी इसके ट्रस्ट पर विदेशी मूल के लोगों का प्रभाव कायम बताया जाता है।

ब्रिटिश दौर में हुई थी क्लब की शुरुआत

मुंबई का ब्रीच कैंडी क्लब, जिसे आधिकारिक तौर पर बीच कैंडी स्विमिंग बाथ ट्रस्ट कहा जाता है, वर्ष 1878 में ब्रिटिश काल के दौरान स्थापित किया गया था। उस समय यहां केवल यूरोपीय नागरिकों को ही प्रवेश की अनुमति थी। लंबे समय तक भारतीयों को क्लब की सदस्यता और सुविधाओं से दूर रखा गया।

बाद में 1960 के दशक में बढ़ते दबाव और सामाजिक बदलावों के चलते भारतीयों को भी क्लब में प्रवेश मिलने लगा। हालांकि क्लब के प्रशासनिक और ट्रस्ट संबंधी अधिकार अब भी मुख्य रूप से यूरोपीय मूल के लोगों के पास बताए जाते हैं।



  • ट्रस्ट चुनाव में भारतीयों को नहीं मिलता वोट का अधिकार

    जानकारी के अनुसार, क्लब में आज करीब चार हजार सदस्य हैं, जिनमें बड़ी संख्या भारतीयों की है। इसके बावजूद ट्रस्ट से जुड़े चुनावों में भारतीय सदस्य मतदान नहीं कर सकते। ट्रस्ट में शामिल होने के लिए यूरोपीय नागरिकता या यूरोपीय पासपोर्ट जैसी शर्तें अब भी चर्चा का विषय बनी रहती हैं।

    अरब सागर के किनारे स्थित इस क्लब में विशाल स्विमिंग पूल, टेनिस कोर्ट और कई खेल सुविधाएं मौजूद हैं। इसकी सदस्यता लंबे इंतजार और ऊंचे सामाजिक रसूख से जुड़ी मानी जाती है।

    शशि थरूर ने सुनाया बचपन का अनुभव

    कांग्रेस सांसद Shashi Tharoor ने भी अपने बचपन का एक अनुभव साझा करते हुए इस क्लब में नस्लीय भेदभाव का जिक्र किया था। उन्होंने बताया था कि 1960 के दशक में वह अपने एक अमेरिकी मित्र के साथ क्लब पहुंचे थे। उस समय उन्हें स्विमिंग पूल से केवल इसलिए बाहर निकाल दिया गया क्योंकि वे भारतीय थे।

    थरूर के मुताबिक, उनके अमेरिकी मित्र को लगा था कि विदेशी मेहमान के साथ होने के कारण किसी का ध्यान उन पर नहीं जाएगा, लेकिन क्लब प्रशासन ने उन्हें पूल से बाहर कर दिया और परिसर छोड़ने को कहा। उस दौर में क्लब में केवल गोरे लोगों का प्रभाव था और अश्वेत विदेशी लोगों के साथ भी भेदभाव किए जाने के आरोप लगते रहे।

    दिल्ली जिमखाना क्लब को लेकर भी बढ़ी बहस

    दिल्ली जिमखाना क्लब को लेकर भी इन दिनों विवाद जारी है। केंद्र सरकार ने राजधानी के बेहद महंगे इलाके में फैली बड़ी सरकारी जमीन के सीमित लोगों द्वारा उपयोग पर सवाल उठाते हुए क्लब को नोटिस जारी किया है। सरकार का तर्क है कि सार्वजनिक संपत्ति का लाभ कुछ चुनिंदा प्रभावशाली लोगों तक सीमित नहीं रहना चाहिए।

    ब्रिटिश काल में स्थापित दिल्ली जिमखाना क्लब और मुंबई का ब्रीच कैंडी क्लब दोनों ही लंबे समय से देश के एलीट सामाजिक ढांचे और विशेषाधिकारों की प्रतीक संस्थाओं के रूप में देखे जाते रहे हैं।

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