
इंदौर: ग्वालियर और इंदौर में नीट (NEET) की पुनर्परीक्षा शांतिपूर्ण ढंग से समाप्त हुई. जैसे ही छात्र परीक्षा हॉल से बाहर निकले, परीक्षा केंद्रों के बाहर भावुक और गर्व से भरे नजारे देखने को मिले. छात्रों के चेहरे पर परीक्षा खत्म होने का सुकून था, तो वहीं उनके माता-पिता की आंखों में बच्चों के संघर्ष के लिए गर्व दिखाई दिया.
परीक्षा देकर बाहर निकले परीक्षार्थियों ने पेपर के स्तर को लेकर अपनी राय साझा की. अधिकांश छात्रों का मानना था कि इस बार फिजिक्स का सेक्शन काफी कठिन रहा. एक परीक्षार्थी ने बताया कि फिजिक्स के सवालों ने बहुत ज्यादा उलझाया. छात्रों के अनुसार, फिजिक्स का स्तर इतना कठिन था कि इसकी तुलना आने वाले समय के कठिन स्तर से की जा सकती है. वहीं बायोलॉजी के सेक्शन में भी कुछ सवालों ने छात्रों को काफी समय तक सोचने पर मजबूर किया.
कठिन फिजिक्स के मुकाबले बायोलॉजी और केमिस्ट्री के पेपर ने छात्रों को कुछ राहत दी. कई छात्रों ने बताया कि बायोलॉजी का हिस्सा काफी आसान रहा. केमिस्ट्री की बात करें तो छात्रों ने इसे ‘मॉडरेट’ यानी मध्यम स्तर का बताया. परीक्षार्थियों के अनुसार, 3 मई को हुए पिछले पेपर की तुलना में इस बार का पेपर काफी अलग और कठिन महसूस हुआ.
जब छात्रों से पिछली परीक्षा के मुकाबले इस बार के पेपर के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि यह पेपर पिछले नीट के मुकाबले काफी ‘टफ’ था. एक छात्र ने फीडबैक देते हुए कहा कि पेपर ‘मॉडरेट टू टफ’ यानी मध्यम से कठिन की श्रेणी में था. हालांकि, 3 मई के पेपर से समानता के सवाल पर एक परीक्षार्थी ने कहा कि पेपर का प्रारूप वैसा ही था, बस फिजिक्स की कठिनाई ने अंतर पैदा कर दिया.
इंदौर में परीक्षा केंद्रों के बाहर घंटों से इंतजार कर रहे माता-पिता ने तालियों की गड़गड़ाहट के साथ अपने बच्चों का स्वागत किया. परिजनों ने अपने बच्चों को ‘वॉरियर’ यानी योद्धा बताया. उनका कहना था कि परीक्षा रद्द होने के बाद महज एक महीने के भीतर दोबारा तैयारी करना बहुत बड़ी चुनौती थी. इन बच्चों ने एक योद्धा की तरह इस चुनौती का सामना किया और दोबारा परीक्षा दी.
छात्रों के लिए यह समय मानसिक रूप से काफी कठिन रहा. एक बार परीक्षा देने के बाद दोबारा उसी मानसिक स्थिति में आना और तैयारी करना आसान नहीं था. परीक्षा केंद्रों के बाहर छात्र अपनी प्रतिक्रिया देते हुए भावुक भी नजर आए. कुल मिलाकर, ग्वालियर में नीट परीक्षा को लेकर छात्रों और उनके अभिभावकों के बीच मिली-जुली प्रतिक्रिया देखने को मिली. अब सभी को परिणामों का इंतजार है, ताकि छात्रों की कड़ी मेहनत का परिणाम सामने आ सके.
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