
नई दिल्ली । हिंदी सिनेमा (Hindi Cinema) की दिग्गज अभिनेत्री (Actress) जीनत अमान (Zeenat Aman) ने अपने लंबे फिल्मी करियर को लेकर खुलकर बात करते हुए उस दौर की कार्यशैली और अभिनेत्रियों के प्रति बने नजरिए पर महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। उन्होंने कहा कि वर्षों तक उनकी पहचान एक ग्लैमरस (Glamorous) अभिनेत्री के रूप में बनाई गई, जबकि वास्तविक जीवन में उनका व्यक्तित्व और सोच इससे बिल्कुल अलग थी। उनके अनुसार, पर्दे पर बनी छवि (Image) ने उनकी वास्तविक पहचान को लंबे समय तक ढककर रखा।
जीनत अमान ने बताया कि उन्हें लंबे समय तक ऐसे किरदारों और छवि के साथ जोड़ा गया, जिसने लोगों के मन में उनकी एक तय तस्वीर बना दी। जब लोग उनसे व्यक्तिगत रूप से मिलते थे तो उन्हें यह देखकर आश्चर्य होता था कि उनका स्वभाव फिल्मों में दिखाई देने वाले किरदारों से बिल्कुल अलग है। उनका मानना है कि उनकी बौद्धिक सोच और अभिनय क्षमता की तुलना में उनके ग्लैमरस व्यक्तित्व को अधिक महत्व दिया गया।
उन्होंने कहा कि उस दौर में फिल्म निर्माण की प्रक्रिया में महिलाओं की भागीदारी बेहद सीमित थी। अधिकांश निर्णय पुरुष प्रधान टीम द्वारा लिए जाते थे और अभिनेत्रियों की रचनात्मक राय पर बहुत कम ध्यान दिया जाता था। उनका कहना है कि उनसे अधिक अपेक्षा इस बात की रहती थी कि वे गीतों, नृत्य और आकर्षक दृश्यों के माध्यम से दर्शकों को प्रभावित करें, जबकि किसी किरदार की गहराई या प्रस्तुति को लेकर उनकी भागीदारी सीमित रहती थी।
जीनत अमान ने यह भी साझा किया कि कई बार फिल्म निर्माण के दौरान उनसे अधिक आकर्षक और बोल्ड परिधान पहनने की अपेक्षा की जाती थी। हालांकि उनकी अपनी पसंद अपेक्षाकृत संतुलित और सादगीपूर्ण होती थी, लेकिन व्यावसायिक सोच के चलते उनके लुक और प्रस्तुति को अधिक ग्लैमरस बनाने पर जोर दिया जाता था। उनके अनुसार, उस समय अभिनेत्री की प्रतिभा से अधिक उसकी बाहरी छवि को महत्व दिया जाता था।
उन्होंने माना कि समय के साथ हिंदी फिल्म उद्योग में कई सकारात्मक बदलाव आए हैं। आज महिला कलाकारों को पहले की तुलना में अधिक मजबूत किरदार, बेहतर अवसर और निर्णय प्रक्रिया में भागीदारी मिल रही है। इसके बावजूद उनका मानना है कि मनोरंजन जगत में महिलाओं को केवल उनकी बाहरी छवि के आधार पर आंकने की प्रवृत्ति पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है और इस सोच में अभी भी बदलाव की आवश्यकता है।
जीनत अमान का कहना है कि किसी कलाकार का मूल्यांकन उसकी अभिनय क्षमता, अनुभव और रचनात्मक योगदान के आधार पर होना चाहिए, न कि केवल उसकी स्क्रीन इमेज के आधार पर। उनका मानना है कि एक अभिनेता की असली पहचान उसके काम और व्यक्तित्व से बनती है, जबकि ग्लैमर केवल उसके पेशे का एक हिस्सा होता है।
अपने समय की सबसे लोकप्रिय अभिनेत्रियों में शामिल रहीं जीनत अमान ने हिंदी सिनेमा में कई यादगार फिल्मों के जरिए अलग पहचान बनाई। आधुनिक सोच, आत्मविश्वास और नए तरह के किरदारों के कारण उन्होंने फिल्म उद्योग में अपनी अलग जगह बनाई। आज भी उनके विचार और अनुभव नई पीढ़ी के कलाकारों के लिए प्रेरणा का स्रोत माने जाते हैं।
हालिया बयान के माध्यम से उन्होंने एक बार फिर यह सवाल उठाया है कि क्या किसी कलाकार को केवल उसकी बाहरी छवि तक सीमित कर देना उचित है। उनका मानना है कि समय के साथ दर्शकों और फिल्म उद्योग दोनों को कलाकारों की प्रतिभा, विचार और रचनात्मक योगदान को समान महत्व देना चाहिए, ताकि अभिनय की वास्तविक पहचान केवल ग्लैमर तक सीमित न रह जाए।
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