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पाकिस्तान ही नहीं अब भारत के परमाणु हथियारों की जद में चीन भी, टेंशन में आया ड्रैगन


स्टॉकहोम: भारत (India) के लिए परमाणु प्रतिरोध (Nuclear deterrence) का केंद्र अभी भी इस्लामाबाद (Islamabad) ही है लेकिन भारत के परमाणु बमों (nuclear weapons) की जद में अब चीन (china) भी आ गया है। भारत लंबी दूरी के परमाणु हथियारों पर अधिक जोर दे रहा है, जिसमें पूरी चीन में लक्ष्य तक पहुंचने में सक्षम हथियार शामिल हैं। दुनियाभर में परमाणु बम और घातक हथियारों पर नजर रखने वाली संस्था स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (SIPRI) ने अपनी ताजा रिपोर्ट में इसका खुलासा किया गया है। परमाणु हथियारों को लेकर जारी इस रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत अपने परमाणु हथियारों को लेकर बड़ा बदलाव कर रहा है। इसमें कहा गया है कि भारत ने साल 2023 में अपने परमाणु बमों के भंडार को बढ़ाया है और वह पाकिस्तान से आगे निकल गया है।


हथियारों को लॉन्चर से जोड़ सकता है भारत
भारत के बारे में विस्तार से बताते हुए रिपोर्ट में कहा गया है कि नई दिल्ली ने परमाणु हथियारों को विमान, जमीन से मार करने वाली मिसाइल और बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बियों की मजबूत परमाणु त्रयी को सौंपा है। इसमें आगे कहा गया है कि लंबे समय से माना जाता रहा है कि भारत शांति काल के दौरान अपने परमाणु हथियारों को लॉन्चरों से अलग रखता है। हालांकि, देश के हालिया कदमों से पता चलता है कि भारत शांति काल में अपने कुछ वारहेड्स को उनके लॉन्चरों के साथ जोड़ने की दिशा में आगे बढ़ सकता है।

पाकिस्तान से आगे निकला भारत
सिपरी ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि परमाणु बमों से लैस सभी 9 देशों ने अपने हथियारों का आधुनिकीकरण किया है। इसमें कहा गया है कि साल 2023 में भारत के परमाणु बमों की संख्या पाकिस्तान से आगे निकल गई है। बीते साल में भारत ने 8 नए परमाणु बम बनाए थे, जबकि पाकिस्तान ने इस दौरान एक भी परमाणु बम नहीं बनाया। जनवरी 2024 में भारत के परमाणु शस्त्रागार में 172 परमाणु बम थे, जबकि पाकिस्तान के पास यह संख्या 170 थी। भारत के पड़ोसी चीन के पास 500 परमाणु हथियार हैं। वहीं, रूस 5580 परमाणु बमों के साथ पहले नंबर पर है।

थिंक टैंक के अनुसार, भारत, पाकिस्तान और उत्तर कोरिया सभी बैलिस्टिक मिसाइलों पर कई वारहेड तैनात करने की क्षमता हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं, जो अमेरिका, रूस, फ्रांस, ब्रिटेन के पास पहले से ही है। हाल ही में चीन ने भी इसे हासिल किया है। थिंक टैंक ने कहा है कि इस तकनीक से तैनात हथियारों में वृद्धि होगी और परमाणु संपन्न देशों के द्वारा अधिक धमकी देने की संभावना भी होगी।

चीन की क्या है क्षमता?
सिपरी ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि चीन तेजी से अपनी सेनाओं के आधुनिकीकरण में लगा हुआ है। इसके आधार पर चीन के पास इस दशक के अंत तक कम से रूस और अमेरिका के बराबर अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइलें हो सकती हैं। हालांकि, इसमें चीन के परमाणु हथियारों का भंडार अभी भी रूस या अमेरिका के भंडार की तुलना में काफी छोटा रहने की उम्मीद है। चीन के पास अभी 500 परमाणु हथियार हैं। इसमें कहा गया है कि चीन दुनिया में सबसे तेजी से अपने परमाणु शस्त्रागार का विस्तार कर रहा है।

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