
इंदौर। नगर निगम (Municipal council) द्वारा अब हर संपत्ति (property) की तीन स्तर पर जांच (three-level verification) करने का काम शुरू कर दिया गया है। इसके तहत एक तरफ जहां जनगणना के तहत हुई मकान गणना के आंकड़ों के आधार पर जांच की जा रही है, वहीं दूसरी तरफ बिजली कंपनी से मिली जानकारी भी जांच का आधार बन रही है। निजी क्षेत्र के ठेकेदार के माध्यम से अगले महीने से नगर निगम द्वारा पूरे शहर में संपत्ति का जीआईएस सर्वे भी शुरू किया जा रहा है।
नगर निगम द्वारा संपत्तिकर के माध्यम से अधिक से अधिक राजस्व अर्जित करने पर जोर दिया जा रहा है। इसके तहत अब तीन स्तर पर एक साथ काम शुरू किया गया है। इस काम के तहत नगर निगम का लक्ष्य यह है कि निगम को संपत्तिकर के रूप में जितनी राशि प्राप्त होती है उस राशि को दोगुना से ज्यादा करना है। इसके लिए नगर निगम द्वारा जनगणना के तहत हुई मकान गणना के आधार पर संपत्ति की जांच करने का काम शुरू किया गया है। मकान गणना में यह हकीकत सामने आ गई है कि कहां पर कौन सा मकान है और वह मकान आवासीय है या फिर व्यावसायिक उपयोग में लिया जा रहा है। इस जानकारी को भोपाल मॉडल पर नगर निगम द्वारा चेक करते हुए जिन संपत्ति से टैक्स नहीं मिल रहा है उनसे टैक्स प्राप्त करने का काम शुरू किया गया है। इसके साथ ही नगर निगम के पास बिजली कंपनी से भी जानकारी आ गई है। मध्यप्रदेश पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा नगर निगम को नाम पेट के साथ वह सूची दे दी गई है, जिसमें शहर में आवासीय और व्यावसायिक उपयोग के लिए कंपनी द्वारा दिए गए बिजली कनेक्शन की जानकारी है। इस जानकारी के आधार पर भी नगर निगम द्वारा शहर की विभिन्न संपत्ति की जांच का काम शुरू किया गया है। इसी बीच नगर निगम द्वारा पिछले दिनों शहर में जीआईएस सर्वे करने के लिए भी टेंडर किया गया था। इस टेंडर में चयनित की गई फर्म के साथ नगर निगम का एग्रीमेंट हो गया है। अब अगले महीने अगस्त में इस फर्म द्वारा काम शुरू कर दिया जाएगा। 1 साल की अवधि में यह फर्म पूरे शहर में स्थित सभी संपत्तियों की जांच करेगी। इसके साथ ही इस फार्म द्वारा नगर निगम को अपनी जांच रिपोर्ट भी दी जाएगी। निगम द्वारा टेंडर में शर्त रखी गई है कि इस कंपनी के सर्वे के आधार पर संपत्तिकर की राशि में जो बढ़ोतरी होगी उसकी 7त्न राशि इस कंपनी को दी जाएगी। कंपनी द्वारा इसी आधार पर पूरे शहर का सर्वे शुरू किया जाएगा। इस काम के लिए कंपनी द्वारा 10 टीमें तैयार की गई हैं। नगर निगम आयुक्त क्षितिज सिंघल का कहना है कि इस तरह तीन स्तरीय व्यवस्था से जांच होने से संपत्तिकर की चोरी रोकने में निगम की टीम सफल हो सकेगी। इसके साथ ही हम पर्याप्त संपत्तिकर की राशि का संग्रहण कर सकेंगे। जब टैक्स से मिलने वाला राजस्व बढ़ जाएगा तो फिर इससे निगम की आर्थिक स्थिति में भी सुधार आ जाएगा।
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