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हरियाणा में अपात्र किसानों से पीएम किसान सम्म्मान निधि की रिकवरी के आदेश


पलवल । हरियाणा में (In Haryana) अपात्र किसानों से (From ineligible Farmers) पीएम किसान सम्म्मान निधि (PM Kisan Samman Nidhi) की रिकवरी के आदेश (Orders for Recovery) । पीएम किसान सम्मान निधि के तहत लाभ ले रहे अपात्र किसानों पर अब हरियाणा सरकार ने शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। ऐसे किसानों की छंटनी कर उन्हें नोटिस जारी करते हुए रिकवरी के आदेश दिए है।


पलवल जिले में इस तरह के कुल 183 किसान हैं जो इस योजना का पात्र न होने पर भी आर्थिक लाभ ले रहें हैं। इतना ही नहीं इनमें वो लोग भी शामिल हैं, जो सरकारी विभाग से रिटायर होने के बाद भारी भरकम पेंशन भी ले रहें हैं और प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना का भी लाभ उठा रहे थे। हरियाणा प्रदेश के पलवल जिले के हजारों किसानों को पीएम किसान सम्मान निधि योजना की 14वीं किस्त लाभ मिला लेकिन इस मामले में अपात्र किसान पिछले लंबे समय से किसान सम्मान निधि योजना का लाभ उठा रहे थे, जब सरकार को इस मामले में जानकारी हुई तो तत्परता से कार्रवाई करते हुए पाया गया कि इनमें से सरकार ने पलवल जिले में अब तक 183 किसान को अपात्र पाया है। अपात्र किसान 18 लाख 4000 की राशि सरकार से ले चुके थे। जिसकी रिकवरी के आदेशों को लेकर कृषि विभाग द्वारा किसानों को नोटिस जारी किया है, जिसमें से कुछ किसानों ने किसान सम्मान निधि के लगभग 268000 की धनराशि वापस कर दी है।

बता दें कि प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत किसानों को सालाना 6000 रुपए की आर्थिक मदद दी जाती है। ये राशि हर 4 महीने के अंतराल पर 3 किस्तों में 2-2 हजार रुपए करके भेजी जाती है। इस योजना की अब तक 14 किस्तें दी जा चुकी हैं। कृषि खंड अधिकारी देवेंद्र कुमार ने बताया कि किसानों को नोटिस दे दिया गया है लेकिन कुछ किसान अभी तक इस राशि को नहीं लौटा पाए हैं जो कि चिंता का विषय है जिसमें 18 किसान की तो मौत भी हो चुकी है।

एक सवाल के जवाब पर उन्होंने बताया की सरकारी नौकरी से रिटायर होने के बाद पेंशन लेने वाले किसान भी इस योजना का लाभ ले रहे थे। हालांकि इस योजना का लाभ उन किसानों के लिए है जो सरकार की अन्य सुविधाओं का लाभ नहीं ले रहे हैं, जबकि 180000 रुपए से कम आय वाले किसानों के लिए यह योजना सरकार द्वारा दी जा रही थी। बरहाल सरकारी योजनाओं का इस तरह से अपात्र लोगों का लाभ उठाना देश का कोई नया मामला नहीं है। अब देखना यह होगा कि आवेदन के समय अपात्र किसानों से जो फार्म भरवाये गए थे उनमें किन अधिकारियों की लापरवाही रही क्या उन पर कार्रवाई की जाएगी।

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