
उज्जैन। गणेश उत्सव के आगमन की तैयारियाँ उज्जैन में जोरों पर हैं, और मूर्तिकारों के कारखानों में गणेश प्रतिमाओं की रंगाई-पुताई का काम शुरू हो चुका है। मूर्तिकार दिन-रात एक करके बप्पा की मूर्तियों को अंतिम रूप देने और उन्हें आकर्षक रंगों से सजाने में जुटे हैं।
सितम्बर के तीसरे सप्ताह में गणेशजी का आगमन होना है, लेकिन इस साल शहर में मिट्टी की गणेश प्रतिमाएँ जून अंत में ही बनना शुरू हो गई हैं। इस साल उज्जैन के बंगाली और राजस्थानी मूर्तिकारों को पिछले सालों की तुलना में 20 फीसदी ज्यादा प्रतिमाएं बनाने का आर्डर मिला है। इसमें सबसे ज्यादा मांग शिव के स्वरूप में बनी गणेश प्रतिमाओं की हैं। उज्जैन में मिट्टी की गणेश प्रतिमाएँ बंगाली चौराहे, देवास गेट और नागझिरी क्षेत्रों में बने कारखानों पर बनाई जाती है। क्षेत्र में इन कारखानों में मिट्टी की गणेश प्रतिमाएं बनना शुरू हो गई है, जिसे बंगाली और राजस्थानी मूर्तिकार आकार दे रहे हैं। हर साल इन कारखानों में अलग अलग तरह के स्वरूप में गणेशजी की प्रतिमाएं बनकर तैयार की जाती रही है, हर साल एक से डेढ़ महीने पहले मिलने वाले ऑर्डर इस साल तीन महीने पहले से ही मिल गए हैं। यह प्रतिमाएं 10 से 15 फीट तक की ऊंचाई वाली बनाई जा रही हैं। जिसकी कीमत 15 से 25 हजार के बीच होती है। नागझिरी क्षेत्र के मूर्तिकार राजू भाई ने बताया कि हर साल आमतौर पर करीब 10 मूर्तिकार कारखाने में रहते हैं, लेकिन इस साल जैसे प्रतिमाओं की मांग बढ़ी है। राजस्थान से 10 और मूर्तिकार बुलवाए जा रहे हैं।
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