
- चल-अचल संपत्ति व कब्जे का लेखा जोखा भी होगा ऑनलाइन
उज्जैन। शासन द्वारा उज्जैन सहित प्रदेश के 22 हजार मंदिरों और देवस्थलों का डिजिटल डेटाबेस तैयार कराया जा रहा है। ताकि भविष्य में मंदिरों के संरक्षण और संवर्धन की स्थायी व पारदर्शी नीति तैयार की जा सके। इसमें उज्जैन जिले के 2536 मंदिर शामिल हैं।
उल्लेखनीय है कि प्रदेश में अभी शासन के नियंत्रण में 22,098 मंदिर और देवस्थान सूचीबद्ध हैं। इनमें 2 ज्योतिर्लिंग और 4 देवी शक्तिपीठ हैं। फिलहाल इन मंदिरों और उनकी संपत्तियों की देखरेख कलेक्टर के स्तर पर होती है। अब सरकार शासन के नियंत्रण में संचालित प्रदेश के करीब 22 हजार मंदिर और देवस्थानों का सरकार पहली बार एकीकृत डिजिटल डेटाबेस तैयार करा रही है। धार्मिक न्यास और धर्मस्व विभाग यह डेटाबेस तैयार कर रहा है। इसमें उज्जैन जिले के दो हजार 536 मंदिर व देव स्थल शामिल हैं। नया डेटाबेस तैयार होने के बाद पहली बार सभी शासन-संधारित मंदिरों की संपत्ति और उसकी वास्तविक स्थिति का राज्य स्तरीय रिकॉर्ड उपलब्ध होगा। योजना के तहत हर मंदिर का नाम और इतिहास ही नहीं, बल्कि पुजारी का नाम, मंदिर के नाम दर्ज चल-अचल संपत्ति, उसकी मौजूदा स्थिति की जानकारी भी दर्ज हो रही हैं। इसके बाद इसे विभाग के पोर्टल पर आम लोगों के लिए सार्वजनिक किया जाएगा।
सबसे ज्यादा मंदिर उज्जैन जिले में
सरकारी रिकॉर्ड के मुताबिक प्रदेश में सबसे ज्यादा मंदिर उज्जैन जिले में सूचीबद्ध हैं। इसलिए योजना की पायलेट प्रोजेक्ट के रुप में सबसे पहले शुरुआत उज्जैन और ग्वालियर जिले से होगी। डिजिटल डेटाबेस में जमीन की स्थिति भी दर्ज होगी।