
उज्जैन। महाकाल की नगरी उज्जैन में सिंहस्थ की तैयारियों के बीच शहरवासियों के मिल रहे स्वैच्छिक सहयोग को मुख्यमंत्री ने दुनिया के लिए उत्कृष्ट उदाहरण बताया है। सोमवार को बाबा महाकाल की पांचवीं सवारी के रामघाट पहुंचने के बाद प्रसारण कक्ष से संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि उज्जैन केवल धार्मिक नगरी नहीं, बल्कि काल और गौरव की नगरी है।
महाकाल की सवारी से जुड़ा देश-दुनिया का जनमानस
बाबा महाकाल की पांचवीं सवारी का जनसंपर्क विभाग के माध्यम से लाइव प्रसारण किया गया। इससे लाखों-करोड़ों श्रद्धालु घर बैठे सवारी के साक्षी बने। देश के अलग-अलग हिस्सों के साथ विदेशों में रहने वाले श्रद्धालुओं ने भी प्रसारण देखा। सवारी मार्ग पर घरों की छतों और रास्तों के किनारे श्रद्धालुओं की भीड़ रही। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक में बाबा महाकाल के दर्शन को लेकर उत्साह और उमंग नजर आई।
महाकाल लोक के बाद धार्मिक पर्यटन को नई पहचान
सीएम ने कहा महाकाल लोक के निर्माण के बाद उज्जैन से सनातन संस्कृति और धार्मिक पर्यटन की धारा पूरी दुनिया तक पहुंची है। अब मध्यप्रदेश की प्राकृतिक, वन्य, नैसर्गिक और पुरातात्विक विरासत से भी दुनिया को परिचित कराया जाएगा। सरकार प्रदेश के ऐसे सभी पर्यटन स्थलों को नई पहचान देने के लिए काम कर रही है।
भारत की संस्कृति को जोडऩे वाला आयोजन
उन्होंने कहा कि बाबा महाकाल उत्तर और दक्षिण भारत की सांस्कृतिक परंपराओं को जोडऩे वाले हैं। सावन-भादौ में निकलने वाली सवारी इसी सांस्कृतिक एकता का प्रतीक है। दो सोमवार तक महाकाल नगर भ्रमण कर भक्तों को दर्शन और आशीर्वाद देंगे। सीएम ने कहा कि सरकार का लक्ष्य विकास के साथ जनकल्याण को गति देना है। सम्राट विक्रमादित्य की नगरी उज्जैन को फिर उत्कृष्टता की ओर ले जाने और सिंहस्थ-2028 को ऐतिहासिक बनाने के लिए सरकार पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
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